पटना

SIR के लिए आवास प्रमाण पत्र का फर्जीवाड़ा, अधिकारियों के हस्ताक्षर भी फर्जी; कई जिलों में फैला नेटवर्क

बिहार में इन दिनों आवास प्रमाण पत्र के नाम पर धोखाधड़ी का जबरदस्त खेल चल रहा है। समस्तीपुर में एक मामले का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस विभिन्न स्तरों पर मामले की जांच कर रही है। इसके अलावा, अन्य जांच एजेंसियां भी इस मामले की जांच में शामिल हो सकती हैं।

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बिहार में SIR के लिए बन रहे फर्जी आवास प्रमाणपत्र (फोटो - NewsonAIR)

बिहार में इन दिनों SIR का शोर है। विपक्ष इस मुद्दे पर चुनाव आयोग व सत्तारूढ़ NDA पर हमलावर है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और आधार सहित 11 दस्तावेजों के आधार पर वोटर लिस्ट में नाम दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच बिहार में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने के मामले सामने आ रहे हैं।

फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने के मामले में समस्तीपुर निवासी राजन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इस मामले में जांच तेज कर दी है। राजन पर आरोप है कि उसने डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करके फर्जी प्रमाण पत्र बनाए, जिसमें संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर भी जाली थे।

बिहार के कई जिलों में फैला नेटवर्क

पुलिस ने अब तक 100 से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्रों की पहचान की है और यह जांच कर रही है कि क्या इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एसपी सागर कुमार ने बताया कि राजन का नेटवर्क बिहार के कई जिलों में फैला हो सकता है और वह वाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से अपने सहयोगियों से जुड़ा था।

22 अगस्त को दिघलबैंक प्रखंड के गन्धर्वडांगा थाना क्षेत्र में एक कॉमन सर्विस सेंटर से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाने का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने पहले आरोपी अजय कुमार साह को गिरफ्तार किया था। इस दौरान पुलिस ने संदिग्ध प्रमाण पत्रों के साथ-साथ अन्य उपकरण भी बरामद किए।

RTPS काउंटर से ही बनवाएं प्रमाण पत्र

पुलिस ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों से भी संपर्क किया है, ताकि पूरे मामले की गहराई में जाकर जांच की जा सके। एसडीएम अनिकेत कुमार ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे प्रमाण पत्र केवल आरटीपीएस काउंटर से ही बनवाएं और बिचौलियों से बचें। पुलिस की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई के लिए कई बिंदुओं को गुप्त रखा गया है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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