पटना

Bihar Sasaram Violence:सासाराम हिंसा मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, BJP के पूर्व विधायक गिरफ्तार

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 29, 2023, 11:47 AM IST

Bihar Sasaram Violence: बिहार के सासाराम हिंसा मामले में पुलिस ने भाजपा के पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद और मोहम्मद शाहनवाज आलम को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ कोर्ट ने गैर जामनतीय वारंट जारी किया था।

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सासाराम हिंसा

Photo : PTI

Bihar Sasaram Violence: बिहार के सासाराम में रामनवमी के दिन भड़की हिंसा मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रोहतास पुलिस ने इस मामले में भाजपा नेता व पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जवाहर प्रसाद को उनके घर से गिरफ्तार किया गया है। बता दें, रोहतास पांच बार के विधायक रहे हैं।

अब तक हुईं 63 गिरफ्तारियां

सासाराम हिंसा के संबंध में बिहार पुलिस ने बयान भी जारी किया है। पुलिस ने बताया है कि मामले में अब तक कुल 63 गिरफ्तारियां की गई हैं। इसके अलावा दो अभियुक्तों ने कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने बताया, कोर्ट ने पूर्व विधायक जवाहर प्रसाद व मोहम्मद शाहनवाज आलम के खिलाफ गैर जामनतीय वारंट जारी किया था, जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।

38 आरोपियों की तलाश कर रही पुलिस

पुलिस ने बताया, इस मामल में कोर्ट ने 38 अन्य अभियुक्तों के खिलाफ गैर जामनतीय वारंट जारी किया है, इनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं अन्य 12 अभियुक्तों के खिलाफ भी आज इश्तेहार का तामिला कराया जाएगा।

जमकर हुई थी हिंसा और आगजनीबिहार के सासाराम में रामनवमी जुलूस के दौरान जमकर हिंसा और आगजनी हुई थी। जानकारी के मुताबिक, जुलूस के दौरान पत्थरबाजी की गई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था, आलम यह था कि कई कई इलाकों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी हिंसा भड़की थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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