नोएडा

बारिश होते ही धंसी नोएडा की सड़क, पॉश सेक्टर 100 में बना 15 फुट का गड्ढा, खोखले साबित हुए अथॉरिटी के दावे

नोएडा में आज सुबह हुई हल्की बारिश ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी। बारिश के बाद नोएडा के पॉश सेक्टरों में से एक सेक्टर-100 के पास सड़क धंस गया।

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नोएडा सेक्टर 100 में बारिश से सड़क धंसी।

नोएडा: नोएडा में आज सुबह हुई हल्की बारिश ने एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी। बारिश के बाद नोएडा के पॉश सेक्टरों में से एक सेक्टर-100 के पास सड़क धंस गया। जिस वजह से बीच सड़क पर बड़ा गड्ढा हो गया, सड़क धंसने के बाद नोएडा प्राधिकरण की मानसून को लेकर की गई तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

दरअसल, आज सोमवार सुबह हुई बारिश बारिश के बाद जहां एक ओर उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर जलभराव और जाम ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर सेक्टर-100 के पाथवे स्कूल के नजदीक से सामने आई, जहां सर्विस रोड अचानक धंस गई और सड़क पर पर करीब 12 फुट चौड़ी और 15 फुट गहरी गढ्ढा हो गया।

बीच सड़क पर गड्ढा बनने के कारण स्कूली बच्चों को ले जाने वाले पेरेंट्स और आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग इसे नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही बता रहे हैं। इतना बड़ा गड्ढा होने के बाद से आसपास के लोगों में लगातार जान-माल के नुकसान का डर बना हुआ है।

हर साल मॉनसून से पहले नोएडा प्राधिकरण जलभराव और सड़कों की मरम्मत को लेकर दावे करता है, लेकिन हल्की बारिश के बाद इस तरह सड़क का धंसना दर्शाता है कि सारी तैयारियां सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। एक मामूली बारिश में भी दावों की पोल खुल जाती है और असलियत सामने आ जाती है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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