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40 लाख के विवाद में ली गई जान; समीर सैफी मर्डर केस में अदालत का फैसला, 3 को मौत की सजा, एक को 7 साल जेल

मुजफ्फरनगर में चर्चित अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को फांसी और एक को सात साल की सजा दी है। फैसले के दौरान जज ने एक भावुक कविता लिखकर न्याय और अपराध के इस प्रकरण को विशेष रूप से रेखांकित किया।

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समीर सैफी मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला (सांकेतिक फोटो)

Muzaffarnagar Lawyer Murder Case: मुजफ्फरनगर में चर्चित अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में सोमवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को फांसी की सजा दी है, जबकि एक अन्य आरोपी को 7 के कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा सभी दोषियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने इस मामले में निर्णय सुनाते हुए अपने आदेश में एक मार्मिक कविता भी लिखी।

उन्होंने लिखा- “कचहरी की सीढ़ियों पर, आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है, जहां दलीलों की गूंज थी कल, वहां खामोशी डोल रही है। काला कोट जो ढाल बना था, सच की हर एक लड़ाई में, वो गिर पड़ा आज जमीन पर, झूठ की गहरी साजिश में। कल तक जो कानून था जिंदा, हर जुर्म को आईना दिखाता था, आज उसी के रखवाले को, किसी ने बेरहमी से सुला डाला। पर ये खून बेकार नहीं जाएगा।” गौरतलब है कि अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या करीब छह साल पहले उस दिन की गई थी, जब उन्होंने अपने नए चैंबर का उद्घाटन किया था। जांच में सामने आया कि 40 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर यह वारदात हुई थी। मृतक और आरोपी आपस में साझेदारी में पोल्ट्री फार्म का व्यवसाय करते थे।

क्या है पूरा मामला?

यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सुनाया। जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर 2019 की शाम शहर कोतवाली क्षेत्र के लद्दावाला से अधिवक्ता समीर सैफी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। इसके चार दिन बाद, 19 अक्टूबर को उनका शव भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी में बरामद किया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि करीब 40 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। समीर सैफी आरोपियों से अपने पैसे वापस मांग रहे थे, लेकिन उन्होंने भुगतान करने से इंकार कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से अपहरण कर उनकी हत्या की साजिश रची। बताया गया कि आरोपियों ने उन्हें कार में बैठाकर भोपा क्षेत्र के सीकरी स्थित फार्म पर ले गए, जहां रस्सी से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। वारदात को छिपाने के लिए शव को जमीन में दफना दिया गया था।

चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट हुई थी दाखिल

इस मामले में समीर सैफी के पिता अजहर ने मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के दौरान बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज और भोपा क्षेत्र के सीकरी निवासी दिनेश को गिरफ्तार किया। बाद में चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में छह गवाह पेश किए। सभी आरोपी पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे। घटनाक्रम के अनुसार, 15 अक्टूबर 2019 को अधिवक्ता समीर सैफी संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। अगले दिन 16 अक्टूबर को उनके पिता अजहर ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसे उसी दिन अपहरण के मामले में परिवर्तित कर दिया गया। 19 अक्टूबर 2019 को भोपा क्षेत्र से समीर का शव बरामद हुआ। इसके बाद 20 नवंबर 2019 को वादी ने बैंक लेन-देन से संबंधित एक प्रार्थना पत्र भी दिया। 30 जनवरी 2020 को अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लिया। लंबी सुनवाई के बाद 4 अप्रैल 2026 को आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 6 अप्रैल 2026 को अदालत ने उन्हें सजा सुनाई।

घटना के दिन ही हुआ था चैंबर का उद्घाटन

बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि समीर पेशे से अधिवक्ता नहीं था, क्योंकि वह निजी व्यवसाय भी करता था। इस पर स्पष्ट किया गया कि भले ही समीर पहले व्यापार से जुड़ा रहा हो, लेकिन हत्या से पूर्व उसने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण कराकर विधिवत वकालत शुरू कर दी थी। समीर सैफी के पिता अजहर ने अपने बयान में बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन समीर ने कचहरी में अपने नए चैंबर का उद्घाटन किया था।

सुबह विवाद, शाम को हत्या

जांच में सामने आया कि वकील बनने से पहले समीर सैफी और सिंगोल अल्वी साझेदारी में काम करते थे। ‘रॉयल पोल्ट्री फीड’ के नाम से समीर का रजिस्ट्रेशन था और इसी नाम से उसके बैंक खाते संचालित होते थे। व्यवसाय के लिए करीब 25 लाख रुपये का ऋण भी लिया गया था। बाद में 40 लाख रुपये के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। घटना वाले दिन सुबह करीब आठ बजे इस लेन-देन को लेकर समीर के भाई और सिंगोल अल्वी के बीच कहासुनी और झगड़ा भी हुआ था, जिसके बाद शाम को वारदात को अंजाम दिया गया।

दोषियों को मिली सजा

अदालत ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को अपहरण, हत्या, साजिश रचने और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए तीनों को फांसी की सजा सुनाई। वहीं दिनेश को साक्ष्य नष्ट करने का दोषी पाते हुए सात वर्ष की कैद दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि अपहरण में सिंगोल अल्वी की कार का इस्तेमाल किया गया था। सोनू उर्फ रिजवान उस वाहन का चालक था, जबकि शालू उर्फ अरबाज और दिनेश उसके कर्मचारी थे।

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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