मुंबई

दुल्हन को तरस रहे इस गांव के लोग, वजह है बेहद खास

छत्रपति संभाजीनगर में तांड्या गांव में रहने वाले लड़के शादी करने के लिए तरस रहे हैं। इस गांव के लोगों के लिए अच्छे रिश्ते आना बंद हो गए हैं। बेटियों के परिवार वाले उनकी शादी इस गांव में नहीं करना चाह रहे हैं। आइए जानते हैं कि ऐसी क्या वजह है जिस वजह से इस गांव में लड़कों की शादी नहीं हो रही है?

Image

सांकेतिक फोटो

Photo : iStock

महाराष्ट्र में एक ऐसा गांव है, जहां के लोग दुल्हन के लिए तरस रहे हैं। यहां रहने वाले लड़कों को शादी के रिश्ते नहीं मिल रहे हैं। यह गांव छत्रपति संभाजीनगर में स्थित तांड्या गांव है। इस गांव में पानी की कमी है। महिलाओं को रोजाना मीलों चलकर पानी लाने के लिए जाना पड़ता है। इस कारण गांव के लड़कों के लिए अच्छे रिश्ते आना बंद हो गए हैं। जिससे गांवे के पुरुषों की शादी नहीं हो रही और उन्हें दुल्हन नहीं मिल रही।

सालभर पानी की कमी से जूझता है गांव

छत्रपति संभाजीनगर के तांड्या गांव में लगभग 3000 लोग रहते हैं। यह गांव पानी की कमी से जूझ रहा है। यहां सालभर पानी का संकट बना रहता है। गर्मियों के मौसम में यह स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में महिलाओं और बच्चों को तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में कोसों दूर पानी के स्त्रोतों तक जाना पड़ता है। एशिया के सबसे बड़ बांधों में से एक जयकवाड़ी बांध इस गांव से करीब 25-30 किमी दूर है। जहां से पानी लाने के लिए गांव की महिलाएं जाती है। बच्चों को भी स्कूल से वापस आने के बाद पानी लाने में महिलाओं की मदद करनी पड़ती है।

गांव में नहीं देना चाहते लोग अपनी बेटी

पानी की कमी के चलते गांव में लगे नल सूख रहे हैं। वहीं टैंकरों से आने वाला पानी भी 10-12 दिनों एक बार आपूर्ति करता है। ऐसे में गांव की महिलाओं को पानी लाने के लिए मीलों चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में लड़कियों के परिवार को चिंता है कि उनकी बेटियों को जीवनभर पैदल चलना पड़ेगा। इस कठिनाई के कारण बेटियों के परिवार इस गांव में उनकी शादी करने के मामले में पीछे हट जाते हैं।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article