MP गजब है! 500 केस में एक ही व्यक्ति गवाह, अजब गवाह घोटाले की गजब कहानी
- Edited by: Nishant Tiwari
- Updated Jan 13, 2026, 12:29 PM IST
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मऊगंज क्षेत्र के लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज सैकड़ों मामलों में गवाहों को लेकर गंभीर घपले का खुलासा हुआ है। CCTNS पोर्टल के आंकड़ों से सामने आया है कि केवल 6 लोगों को बार-बार सरकारी गवाह बनाया गया, जिनमें कुछ नाम तो 500 से अधिक मामलों में दर्ज हैं
गवाहों के फर्जीवाड़े में नईगढ़ी थाने को माना जा रहा केंद्र
Mauganj News: गवाह कौन होता है? वह व्यक्ति जो किसी घटना का चश्मदीद हो, यानी अपनी आंखों से देखा हो या वह व्यक्ति जो किसी मामले का विशेषज्ञ हो। वह अदालत में सही-सही घटना के बारे में गवाही देता है, जिसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। यह गवाही फैसले को बड़े स्तर पर प्रभावित करती है। लेकिन शायद अब समय आ गया है कि कानून की किताबों में गवाह की परिभाषा बदली जाए और इसमें से चश्मदीद और विशेषज्ञ के ऊपर एक और श्रेणी बनाई जाए- 'तफ्तीश करने वाली पुलिस के पहचान का व्यक्ति'। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में गवाहों से जुड़ा एक अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है। मऊगंज में लौर और नईगढ़ी थाने में 1000 से अधिक मामलों में केवल 6 लोगों को गवाह बनाया गया है। CCTNS पोर्टल पर रिकॉर्ड खंगालने के बाद यह मामला उजागर हुआ। मामला तब सामने आया जब लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस रिकॉर्ड की जांच की गई। CCTNS पोर्टल में यह स्पष्ट हुआ कि कुछ चुनिंदा नाम ही बार-बार सैकड़ों मामलों में गवाह के तौर पर दर्ज किए गए थे।
CCTNS पोर्टल ने खोली पोल
जांच के दौरान CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) पोर्टल पर दर्ज मामलों में यह साफ सामने आया कि कुछ ही नाम सैकड़ों मामलों में बार-बार गवाह के तौर पर दर्ज किए गए। इन कथित गवाहों में दिनेश कुशवाहा, राहुल विश्वकर्मा, अरुण तिवारी और अमित कुशवाहा जैसे नाम शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन लोगों को आबकारी, NDPS और अन्य गंभीर मामलों में एक ही दिन में कई मुकदमों का चश्मदीद बताया गया।
गवाही की अवधारणा पर सवाल
इन मामलों ने तो गवाही के कॉन्सेप्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून के मुताबिक गवाह का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना अनिवार्य है, लेकिन मऊगंज में पुलिस ने इस सिद्धांत को दरकिनार कर दिया। सामने आया है कि जिन लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया, वे पुलिस थाने से जुड़े कामकाज करते थे यानी पुलिसवालों के ही पहचान के लोग थे। इनमें थाना प्रभारी के ड्राइवर, रसोइया और अन्य करीबी कर्मचारी शामिल थे, जिन्हें बिना जानकारी के सैकड़ों मामलों में गवाह बना दिया गया।
500 से ज्यादा मामलों का ‘रिकॉर्डधारी’ गवाह
सबसे चौंकाने वाला मामला अमित कुशवाहा से जुड़ा है, जिसे 500 से अधिक मुकदमों में गवाह बताया गया है। पुलिस ने RTI के जवाब में दावा किया था कि अमित कुशवाहा उनका वाहन चालक नहीं है, लेकिन मीडिया जांच में यह दावा गलत साबित हुआ। कैमरे में अमित कुशवाहा को नईगढ़ी थाने की सरकारी गाड़ी चलाते हुए देखा गया, जिससे पुलिस के बयान की सच्चाई उजागर हो गई।
थाना प्रभारी पर गिरी गाज
इस पूरे गवाह सिंडिकेट का केंद्र नईगढ़ी थाना बताया जा रहा है। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के कार्यकाल में यह व्यवस्था सबसे अधिक फलती-फूलती रही। मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए जगदीश ठाकुर को नईगढ़ी थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया है। इस प्रकरण के बाद पुलिस की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में कानून व्यवस्था के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो।
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