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Bahadurgarh News: सिलेंडर ब्लास्ट से उड़ गई छत, मां-बेटी की मौत

हरियाणा के बहादुरगढ़ में एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के ब्लास्ट से मकान की छत उड़ गई, जिसके मलबे में दबकर मां-बेटी की दर्दनाक मौत हो गई।

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LPG सिलेंडर में ब्लास्ट से उड़ गई छत

Photo : ANI

बहादुरगढ़: सोमवार की शाम एक एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट होने के कारण मां-बेटी की मौत हो गई। वहीं, दूसरी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा बहादुरगढ़ के कुम्हारों वाले मोहल्ले में हुआ है। घटना की सूचना मिलते ही शहर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच में जुट गए। वहीं, मां-बेटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए बहादुरगढ़ के सामान्य अस्पताल भिजवाया गया है। जबिक, एक 3 साल की छोटी बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई रोहतक इलाज के लिए भेजा गया है।

खाना बनाते समय हुआ ब्लास्ट

मृतका की पहचान सुमन नाम की महिला के रूप में हुई है। सुमन शाम के समय खाना बनाने के लिए रसोई घर में गई थी। जब उसने चूल्हा जलाने का प्रयास किया, तभी एलपीजी सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया, जिसकी वजह से घर की छत गिर गई। सुमन की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उसकी दो छोटी बेटियां मलबे के नीचे दब गई। धमाके की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों बच्चियों को मलबे के नीचे से बाहर निकाल कर अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां, 8 वर्षीय एक बच्ची को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, 3 वर्षीय छोटी बच्ची की गंभीर हालत को देखते हुए उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया।

हादसे के वक्त महिला का परिवार किसी काम से बाहर गया हुआ था। जैसे ही परिजनों को इस हादसे के बारे में पता चला तो वह दौड़कर घर पहुंचे। मां- बेटी की इस दर्दनाक मौत से आसपास का माहौल गमगीन बना हुआ है। शहर थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी मौका मुआयना कर मामले की जांच में जुटे हुए हैं। एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के पीछे की असली वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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