मकर संक्रांति 2026 : अयोध्या, हरिद्वार, प्रयाग संगम में भक्तों का रेला, कितने बजे तक चलेगा शाही स्नान?
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Jan 14, 2026, 10:49 AM IST
अयोध्या में सरयू के घाटों, प्रयाग के संगम घाट समेत अन्य घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों में पवित्र स्नान करने पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमानगढ़ी मंदिर और राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
मकर संक्रांति पर प्रयाग संगम में भक्तों का रेला
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व देशभर में आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही यह पर्व पुण्य, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है। इस मौके पर अयोध्या, प्रयागराज और ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालु नदियों में पवित्र स्नान कर रहे हैं। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के बीच मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पर उमड़ पड़े। संगम घाटों पर बुधवार सुबह बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए और सभी उम्र के लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई।
प्रयागराज में संगम घाट पर स्नान के बाद एक श्रद्धालु ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हम अयोध्या से आए हैं और हमने भी पवित्र स्नान किया। इंतजाम बहुत अच्छे हैं। सड़क की सुविधाएं अच्छी हैं और घाटों पर इंतजाम बहुत बढ़िया हैं। घाटों पर प्रशासन के इंतजाम बहुत कुशल और अच्छी तरह से मैनेज किए गए हैं।
क्या बोले श्रद्धालु?
एक महिला ने कहा कि हम पिछले 10-12 सालों से प्रयागराज आ रहे हैं। हर बार एक महीने के लिए रुकते हैं। उन्होंने कहा कि यह इतनी महान और पवित्र जगह है कि इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि बहुत अच्छा अनुभव रहा है। मकर संक्रांति का दिन है और चारों तरफ बस खुशी ही खुशी है।
अयोध्या में सरयू के घाटों पर भी रौनक देखी गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों में पवित्र स्नान करने पहुंचे। कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह 4 बजे से श्रद्धालुओं का स्नान शुरू हो गया। स्नान के बाद श्रद्धालु हनुमानगढ़ी मंदिर और राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पहली बार अयोध्या पहुंचे मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला निवासी एक श्रद्धालु ने कहा कि हमने पहले तीर्थ यात्रा की थी और उसका झंडा उठाया था। हमने इस बार यहां आने का फैसला किया। मिर्जापुर के निवासी एक युवक ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार है। यहां की सरयू नदी को पवित्र माना जाता है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा है।
मकर संक्रांति के मौके पर उत्तराखंड के ऋषिकेश में भी हजारों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी घाट पर पवित्र स्नान किया। तीर्थयात्रियों ने पूजा-पाठ, प्रार्थना और दान-पुण्य किया। राजस्थान के रहने वाले दीपक ने बताया कि वह पिछले आठ साल से गंगा में पवित्र स्नान के लिए ऋषिकेश आते हैं। स्नान करने के बाद दान-पुण्य करते हैं और शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाते हैं।
एक और युवक ने कहा कि भक्त अलग-अलग राज्यों से और विदेश से भी गंगा में पवित्र डुबकी लगाने और दर्शन करने आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पूजा-पाठ करते हैं, प्रार्थना करते हैं, दान करते हैं और अपने परिवार की भलाई और खुशहाली के लिए देवी गंगा से प्रार्थना करते हैं।
पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
इसी तरह उत्तराखंड के हरिद्वार में हर की पौड़ी पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। एक श्रद्धालु ने बताया कि एक समय था जब हम छिपकर कांवड़ यहां लाते थे, कभी उत्तरकाशी के रास्ते और कभी दूसरे रास्तों से। आज हम खुश हैं कि हम बिना किसी डर के आजादी से यात्रा कर सकते हैं।
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि यह बहुत पवित्र स्नान है। यह पूरे साल में एक बार आता है और इसे बहुत पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में स्नान के बाद बहुत अच्छा लग रहा है।
बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्नान
मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार की सुबह पश्चिम बंगाल में हुगली नदी और सागर द्वीप में बंगाल की खाड़ी के संगम पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड का सामना करते हुए सूर्योदय के समय स्नान किया और दक्षिण 24 परगना जिले के द्वीप पर स्थित कपिल मुनि आश्रम में प्रार्थना की जहां गंगासागर मेला का आयोजन हो रहा है। शाही स्नान का समय अपराह्न एक बजकर 19 मिनट से शुरू होने वाला है और यह 24 घंटे तक चलेगा।
देश के विभिन्न कोनों से आने वाले भारी जनसमूह को देखते हुए राज्य सरकार ने कोलकाता से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित सागर द्वीप पर वृहद व्यवस्था की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समुद्र और गंगा की सहायक नदी हुगली नदी के संगम पर अधिक से अधिक लोगों के स्नान करने की उम्मीद है क्योंकि ‘शाही स्नान’ तो अभी शुरू होना है। इसके अलावा वार्षिक मेले के मद्देनजर जिलों में तथा कोलकाता के रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
उन्होंने कहा कि पहली बार अत्याधुनिक जल ड्रोन, जिन्हें ‘बचाव ड्रोन’ के रूप में भी जाना जाता है, को तट के किनारे निरंतर निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन ड्रोनों को विशेष रूप से कपिल मुनि आश्रम और मुख्य स्नान घाटों के आसपास निगरानी बढ़ाने के लिए तैनात किया गया है। ये बचाव ड्रोन 100 किलोग्राम तक का भार ले जाने में सक्षम हैं और संकट में फंसे श्रद्धालुओं को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचा सकते हैं।’’
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