भोपाल : राजधानी में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में महिला सशक्तिकरण की गूंज सुनाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब शासन के सूत्र बहनों के हाथ में आते हैं, तो विकास कार्यों में तेजी और व्यापकता दोनों दिखाई देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को देश को सशक्त बनाने वाला बताया और कहा कि उनके नेतृत्व में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं।
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे देश का लोकतंत्र और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया। हायर सेकंडरी परीक्षा की संयुक्त टॉपर भोपाल की खुशी राय और चांदनी विश्वकर्मा तथा हाई स्कूल परीक्षा की टॉपर पन्ना की प्रतिभा सिंह सोलंकी को मंच पर सम्मान मिला।
महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण कदम
सीएम ने अपने संबोधन में तीन तलाक जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने रानी दुर्गावती और अहिल्याबाई होल्कर के उदाहरण देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की धरती नारी नेतृत्व के गौरवशाली इतिहास की साक्षी रही है। उन्होंने बताया कि अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में काशी में बाबा विश्वनाथ धाम का निर्माण कराया और तीर्थ स्थलों पर यात्रियों के लिए व्यवस्थाएं विकसित कीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 अप्रैल को महिला सशक्तिकरण के उत्सव के रूप में होली और दीवाली एक साथ मनाई जाएगी। उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, राजमाता विजया राजे सिंधिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने सम्मेलन को “विचार यात्रा” बताते हुए कहा कि महिला आरक्षण का सफर लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। 1996, 1999 और 2008 में प्रयासों के बावजूद यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जबकि 2010 में राज्यसभा से पारित होने के बाद भी लोकसभा में अटक गया। अंततः 2023 में इसे संसद में पेश किया गया और अब इसके लागू होने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस अधिनियम से महिलाओं को नीति-निर्माण में 33 प्रतिशत भागीदारी मिलेगी। शिक्षाविद शोभा पेठणकर ने भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप बताते हुए सावित्रीबाई फुले, जीजाबाई और अन्य महान महिलाओं के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कार ही नारी सशक्तिकरण की असली नींव हैं।
