Chhangur Baba: धर्मांतरण के मास्टरमाइंड छांगुर बाबा और उसके नेटवर्क की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। अब इस मामले में एक और बड़ा नाम सामने आया है। उत्तर प्रदेश एटीएस ने बलरामपुर जिला न्यायालय में कार्यरत लिपिक (कोर्ट क्लर्क) राजेश कुमार उपाध्याय को गिरफ्तार कर लिया है। वह काफी समय से फरार चल रहा था और एटीएस को उसकी तलाश थी। उसकी गिरफ्तारी से पूरे नेटवर्क की एक और अहम कड़ी उजागर हुई है। राजेश उपाध्याय की पत्नी के नाम पर पुणे में 16 करोड़ रुपये की एक महंगी जमीन की डील सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि यह सौदा हवाला के जरिए प्राप्त और धर्मांतरण गतिविधियों से जुड़े धन से किया गया हो सकता है। इस डील में छांगुर बाबा के नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
जल्द होगी कानूनी कार्रवाई
यूपी एटीएस ने राजेश को 19 जुलाई 2025 को लखनऊ से गिरफ्तार किया। उसके खिलाफ एफआईआर संख्या 08/24 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 121ए (राजद्रोह की साजिश), 417, 420 (धोखाधड़ी), 153ए (साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाना) और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 की धाराएं 3, 5(1), 5(2), 5(3) और 8(1) में मामला दर्ज है। गिरफ्तार आरोपी राजेश उपाध्याय, पुत्र स्व. श्रीनिवास, मूल रूप से वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र स्थित राजघाट मोहल्ले का निवासी है। वर्तमान में वह लखनऊ के चिनहट थाना क्षेत्र के नौबस्ता कला मोहल्ले में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
एटीएस की जांच जारी
सूत्रों के मुताबिक, राजेश न सिर्फ एक सरकारी कर्मचारी था, बल्कि वह जमीन सौदों की दलाली के जरिए काले धन को वैध बनाने में भी शामिल था। पुणे की जिस 16 करोड़ की डील में उसकी पत्नी का नाम आया है, उस पर एटीएस विशेष रूप से जांच कर रही है। छांगुर बाबा का नेटवर्क कितना गहराई से फैला है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अब तक इस मामले में कई सरकारी पदों पर बैठे लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। एटीएस को आशंका है कि इस गिरोह में और भी प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी गिरफ्तारी आने वाले दिनों में हो सकती है।
