लखनऊ

छांगुर बाबा को लेकर नया खुलासा! लखनऊ के होटल से चला रहा था 'धर्मांतरण का खेल'-Video

छांगुर बाबा को लेकर नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि लखनऊ के होटल में रहकर उसने दो महीने तक धर्मांतरण का रैकेट चलाया और किसी को भनक नहीं लगने दी।

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छांगुर बाबा को लेकर नया खुलासा (फोटो क्रेडिट - ट्विटर)

नई दिल्ली: एटीएस अफसर की पूछताछ के बाद छांगुर बाबा और नीतू से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक छांगुर ने पूछताछ में बताया है कि पिछले साल वो नीतू के साथ बलरामपुर से लखनऊ के विकासनगर के होटल स्टार रूम्स में आकर ठहरा था। यूपी की राजधानी लखनऊ में ये दो महीने रुके थे और यहां से धर्मांतरण नेटवर्क चलाया। जानकारी यह भी मिली है कि छांगुर कमरे से कम ही निकलता था।

पहले दिन की पूछताछ में छांगुर ने 15 साल से धर्मांतरण कराने की बात कबूली है। गिरोह पर शिकंजा कसने पर वह नीतू उर्फ नसरीन के साथ लखनऊ के विकासनगर स्थित होटल में रुका था। जहां से उन्होंने धर्मांतरण का रैकेट चलाया।

छांगुर से मिलने आया था वकील

पूछताछ में छांगुर ने बताया है कि 16 अप्रैल को पहले नीतू होटल आई फिर छांगुर भी आ गया। मैनेजर ने दोनों को कमरा नंबर 102 दिया। आईडी के तौर पर दोनों ने आधार कार्ड लगाए, जिस पर नीतू नवीन रोहरा लिखा था। पांच दिन बाद दोनों ने कमरा बदलवा कर 105 ले लिया। होटल कर्मी ने एटीएस को बताया कि छांगुर से मिलने एक वकील आया था। होटल स्टाफ दोनों को पति-पत्नी समझता रहा लेकिन उम्र में अंतर को देखकर उन्हें संशय हुआ ।

40 बैंक खातों में 100 करोड़ से भी ज्यादा रकम

ईडी की लखनऊ जोनल इकाई ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया था, जिसमें लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और कुछ अन्य के खिलाफ एटीएस की प्राथमिकी का संज्ञान लिया गया।

एजेंसी सूत्रों ने बताया कि ईडी को प्रारंभिक जानकारी मिली है, जिससे पता चलता है कि इस व्यक्ति ने अपने और अपने सहयोगियों से जुड़े 40 बैंक खातों में लगभग 106 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जिनमें से ज्यादातर पश्चिम एशिया से हैं।

पिछले हफ्ते एटीएस ने की थी गिरफ्तारी

पिछले सप्ताह एटीएस की टीम ने छांगुर बाबा और उसके एक सहयोगी को लखनऊ से गिरफ्तार किया था। बाबा पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था। एटीएस इससे पूर्व छांगुर के बेटे और नवीन रोहर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। बाबा और उसके सहयोगियों पर 100 करोड़ रुपये का विदेशी अनुदान हासिल करने का भी आरोप है जिसकी जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय को कहा गया है। एटीएस ने इस मामले में कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है जिसमें छांगुर बाबा, नीतू रोहरा, नीतू के पति नवीन रोहरा सहित चार लोगों की अब तक गिरफ्तारी हो चुकी है। (भाषा इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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