लखनऊ

लखनऊ नगर निगम में पार्षदों की बल्ले-बल्ले, फंड में हुई बंपर बढ़ोतरी; कितना कर सकेंगे खर्च?

लखनऊ नगर निगम के पार्षदों के लिए फंड 1.47 लाख से बढ़कर 2.10 करोड़ हो गया है, जिससे स्थानीय नेताओं को हमारे समुदायों में बड़ा प्रभाव डालने का अधिकार मिला है। इस बीच, मेयर की निधि में 30 करोड़ से 20 करोड़ की कमी आई है, और नगर आयुक्त की निधि में 25 करोड़ से 10 करोड़ की कटौती की गई है।

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लखनऊ नगर निगम (फाइल फोटो)

लखनऊ : नगर निगम में पार्षदों के फंड में वृद्धि की गई है। फंड की राशि 1 लाख 47 हजार से बढ़ाकर 2 करोड़ 10 लाख रुपए की गई। नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। मेयर और नगर आयुक्त की निधियों में कटौती का निर्णय भी लिया गया। मेयर की निधि 30 करोड़ से घटाकर 20 करोड़ की गई। नगर आयुक्त की निधि 25 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ की गई। कार्यकारिणी की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 4236.63 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई। यह बजट पिछले साल के मुकाबले 196.99 करोड़ रुपए अधिक है।

कचरा प्रबंधन के लिए इतना बजट

बजट में 558 करोड़ 40 लाख रुपए सफाई, 330 करोड़ रुपये कचरा प्रबंधन, 25 करोड़ 80 लाख रुपए आकस्मिक व्यय, 20 करोड़ रुपए पेट्रोल और डीजल, और 15 करोड़ रुपए नाला सफाई के लिए निर्धारित किए गए हैं।

लखनऊ नगर निगम ने पार्षदों के फंड को 1 लाख 47 हजार से बढ़ाकर 2 करोड़ 10 लाख रुपए करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय पर नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में मुहर लगी। साथ ही, मेयर की निधि 30 करोड़ से घटाकर 20 करोड़ और नगर आयुक्त की निधि 25 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ कर दी गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 4236.63 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 196.99 करोड़ रुपए अधिक है। बजट में सफाई, कचरा प्रबंधन, आकस्मिक व्यय, पेट्रोल, डीजल, और नाला सफाई के लिए विशेष खर्च का प्रावधान किया गया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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