Lucknow News: संत रामपाल के संस्थान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने यह फैसला हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस नामक संगठन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने अदालत को बताया कि संत रामपाल के संस्थान की पुस्तकों में हिंदू आस्था से जुड़े देवी-देवताओं के प्रति आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में राज्य के प्रमुख सचिव (गृह) को शिकायत दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
सरकार से मांगा जवाब
खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या वह इस मामले में कोई कदम उठाने जा रही है। साथ ही याचिकाकर्ता द्वारा दी गई शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है, उसका भी विवरण कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि संत रामपाल वर्तमान में जेल में बंद हैं और उन पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है।
