लखनऊ

यूपी में पहली बार साइबर अपराधी को सजा; डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर ठगी करने वालों पर अब होगा सख्त एक्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली बार डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर साइबर ठगी के आरोपी को अदालत ने सजा सुनाई है। आरोपी ने खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताकर डॉक्टर से 85 लाख रुपये की ठगी की थी। मामले में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तेज कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। यह फैसला साइबर अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी बनकर सामने आया है।

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डिजिटल गिरफ्तारी साइबर ठगी की पहली सजा (Photo: Canva)

Photo : Times Now Digital

First Digital Arrest Punishment: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 85 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक शातिर अपराधी को विशेष न्यायालय CJM कस्टम ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। यह राज्य का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले को न्यायालय से सजा मिली है, जिससे साइबर अपराधियों को कड़ा जवाब मिला है।

जानकारी के मुताबिक , यह मामला 1 मई 2024 को सामने आया, जब केजीएमयू में तैनात डॉ. सौम्या गुप्ता ने लखनऊ के साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, ड्यूटी के दौरान उन्हें एक फोन कॉल आया जिसमें कॉलर ने खुद को कस्टम अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम पर बुक एक कार्गो में जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएमए (MDMA) बरामद हुआ है। इसके बाद कॉल को एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया गया, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताया और डॉ. गुप्ता को डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार 10 दिनों तक मानसिक दबाव बनाकर उनसे कुल 85 लाख रुपये की ठगी की गई।

ऐसे देते हैं वारदात को अंजाम

देवाशीष राय जैसे साइबर अपराधी आम नागरिकों को फोन कर खुद को CBI, कस्टम या प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताते हैं। वे यह झूठा आरोप लगाते हैं कि संबंधित व्यक्ति का नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या आतंकी फंडिंग जैसे मामलों में सामने आया है। इसके बाद वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म (जैसे Skype) के जरिए पूछताछ का नाटक कर लोगों को डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। दबाव में आकर पीड़ित बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं। यह रकम क्रिप्टो करेंसी (USDT) में बदली जाती है और विभिन्न बैंक खातों में भेज दी जाती है, पुलिस के लिए जिससे रकम को ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है।

तकनीकी साक्ष्यों से ट्रैक कर गिरफ्तारी

लखनऊ पुलिस कमिश्नर और साइबर क्राइम शाखा की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए केवल 5 दिनों में आरोपी देवाशीष राय को गोमतीनगर विस्तार स्थित मंदाकिनी अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि उसने फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल कर यह अपराध अंजाम दिया था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सर्विलांस और खुफिया तंत्र के माध्यम से उसे ट्रैक किया। इसके बाद 2 अगस्त 2024 को चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने सभी गवाहों के बयान दर्ज कराए और जब्त सामग्री का परीक्षण कराया। आरोपी की जमानत याचिका का विरोध कर उसे हिरासत में रखा गया।

न्यायालय की सख्त सजा

विशेष न्यायालय CJM कस्टम, लखनऊ ने आरोपी देवाशीष राय को दोषी ठहराते हुए 7 साल के सश्रम कारावास और ₹68,000 जुर्माने की सजा सुनाई। डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़ा उत्तर प्रदेश का पहला मामला है जिसमें आरोपी को सजा मिली है। यह फैसला साइबर अपराधियों के खिलाफ एक प्रभावी कानूनी चेतावनी है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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