लखनऊ

ABVP के कार्यक्रमों से शुरू हुई थी दयाशंकर और स्वाति सिंह की लव स्टोरी, 22 साल बाद हुआ तलाक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 4, 2023, 11:17 AM IST

Dayashankar singh and Swati singh Love Story: दयाशंकर सिंह और स्वाति सिंह की शादी 18 मई, 2001 को हुई थी। दोनों के बीच कई दिनों से अनबन की खबरें सामने आ रही थीं। 22 साल बाद दोनों के बीच तलाक हो गया है। लखनऊ के पारिवारिक न्यायालय ने दोनों की तलाक की अर्जी पर अपनी मुहर लगा दी।

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दयाशंकर सिंह और स्वाति सिंह के बीच तलाक

Photo : Twitter

Dayashankar singh and Swati singh Divorce: उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और पूर्व मंत्री रहीं स्वाति सिंह के बीच तलाक की खबर है। लखनऊ की पारिवारिक न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश देवेंद्र नाथ सिंह ने दोनों की तलाक की अर्जी पर मुहर लगा दी है। इसके साथ ही दोनों राजनेताओं के बीच 22 साल पुराना रिश्ता भी खत्म हो गया है। बता दें, बीते कई दिनों से दयाशंकर और स्वाति सिंह के बीच अनबन की खबरें सामने आ रही थीं।

बता दें, स्वाति सिंह ने 2012 में तलाक की अर्जी दाखिल की थी, जिसके कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद 2022 में स्वाति सिंह ने दोबारा अर्जी दाखिल की थी और सुनवाई की अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी।

2001 में हुई थी शादी

दयाशंकर सिंह और स्वाति सिंह की शादी 18 मई, 2001 को हुई थी। इन दोनों के दो बच्चे हैं, जिसमें एक बेटा और एक बेटी है। हालांकि, शादी के कुछ सालों के बाद दोनों के रिश्तों में अनबन शुरू हो गई और संबंध खराब होते चले गए। जानकारी के मुताबिक, दयाशंकर और स्वाति करीब 10 सालों से अलग रह रहे हैं। बीच में कुछ खबरें दोनों के बीच घरेलू कलह और मारपीट की भी आई थीं। बता दें, 2017 में भाजपा ने दयाशंकर सिंह का टिकट काटकर स्वाति सिंह को दे दिया था, जीत के बाद उन्हें सरकार में मंत्री भी बनाया गया, जिसके बाद से उनके रिश्ते बिल्कुल खराब हो गए थे।

एबीवीपी के कार्यक्रमों से शुरू हुई थी लव स्टोरी

दयाशंकर और स्वाति सिंह के बीच लव स्टोरी एबीवीपी के कार्यक्रमों से हुई थी। उस समय स्वाति सिंह इलाहाबाद में एमबीए कर रही था, दयाशंकर सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र नेता था। इसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रमों में दोनों की मुलाकात हुई। इसके बाद दोनों के बीच मेलजोल बढ़ता चला गया ओर दोनों ने शादी कर ली।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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