लखनऊ

बहराइच में फिर लौटा आदमखोर भेड़ियों का खौफ, मां की गोद से बच्चा छीनकर ले गया भेड़िया; दहशत में ग्रामीण

Wolf Terror in Bahraich: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भेड़ियों का आतंक फिर से बढ़ गया है। भेड़ियों के हमले से पिछले एक साल में कई बच्चों की मौत हो चुकी है। हाल ही में दो और बच्चों को भेड़िए ने शिकार बना लिया। गांवों में डर का माहौल है, लोग रात में पहरा दे रहे हैं। वन विभाग ने कैमरे, पिंजरे और ड्रोन लगाए हैं लेकिन शिकारी भेड़िया अब तक पकड़ से बाहर है।

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सांकेतिक फोटो (istock)

Photo : iStock

Wolf Attacks in Bahraich: तराई के घने जंगलों और नेपाल सीमा से लगे बहराइच जिले में बीते एक साल से भेड़ियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले साल भेड़ियों ने कम-से-कम एक दर्जन से ज्यादा हमले किए, जिनमें कई बच्चों की मौत हो गई थी और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे। अब दोबारा बहराइच में आदमखोर भेड़िये वापस आ गए है। इस बार भेड़ियों ने अब तक दो बच्चों का शिकार कर लिया है और दो बच्चों को घायल भी कर चुके हैं। वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमों ने गांवों में डेरा डाल दिया है। दिन-रात कॉम्बिंग की जा रही है लेकिन शिकारी भेड़िया अब भी पकड़ से बाहर है।

भेड़ियों के हमले से बच्चों की हुई मौत से बहराइच दहशत में आ चुका है। अगस्त 2025 में जिले के कैसरगंज तहसील के जैतापुर के पास तीन महीने की बच्ची को एक भेड़िया मां की गोद से उठा ले गया था। जुलाई 2025 में फखरपुर ब्लॉक में 7 वर्षीय बच्चे पर भेड़िये ने खेतों में खेलते समय हमला किया था। मई 2025 में महसी क्षेत्र में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाएं घायल हुई थीं। भेड़ियों के हमले से फरवरी 2024 से अप्रैल 2025 के दौरान खैरीघाट और मटेरा रेंज में 6 बच्चों की मौत हो चुकी है, कई पालतू मवेशियों को भी शिकार बनाया है।

गांव में दिन-रात खौफ का आलम

जैतापुर के पास भोर बहरवा गांव में बीते दो दिन पहले गोद में सो रहे बच्चे को मां के हाथ से छीनकर भेड़िया उठा ले गया। इस घटना के बाद गांव में हालात डरावने हो गए हैं। शाम ढलते ही लोग लाठी-डंडे लेकर चौकसी करने निकल जाते हैं। हर घर में रात भर पहरा दिया जा रहा है। रात के साथ ही दिन में भी खौफ का आलम है। दिन में भी जैस ही भेड़िये के होने का शक होता है गांव वाले हांका लगाने लगते है। वन विभाग तो जुटा है ही गांव वाले खुद भी मोर्चा संभाले हुए है।

भेड़िये के खौफ से स्कूल नहीं जा रहे बच्चे

भेड़िये के खौफ से गांव के कई बच्चे अब स्कूल जाना छोड़ चुके हैं स्कूल के रास्ते सुनसान और असुरक्षित हैं। जैतापुर गांव में ज्यादातर कच्चे घरों में दरवाजे नहीं हैं, जिससे रातें और भी लंबी और खतरनाक लगने लगी हैं। घरवाले जागकर अपने बच्चों की रखवाली कर रहे है। गांव के दिनेश जिनकी तीन महीने के बच्ची को भेड़िया उठा ले गया था, उनका और उनकी पत्नी का कहना है कि उन्होंने भेड़िये को देखा है हमला भेड़िये का ही है।

वन विभाग ने जगह-जगह लगाए पिंजरे

वन विभाग भी अलर्ट मोड़ पर काम कर रहा है। थर्मल कैमरों से भेड़िये के मूवमेंट को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है। जंगल और खेतों में मिले पगमार्क की जांच भी की जा रही हैं गांव वालो की सुरक्षा को देखते हुए भेड़िये को पकड़ने के लिए अलग अलग जगह पिंजरे भी लगाए गए है। लेकिन वन विभाग अब तक ये कन्फर्म नहीं कर पाया है कि ये भेड़िया है।

फिलहाल बहराइच के कई गांवों में रात का सन्नाटा डर में बदल चुका है। दरवाजों की कमी और बच्चों की पढ़ाई पर लगी रोक ने गांव की जिंदगी को बेपटरी कर दिया है। लोग टकटकी लगाए वन विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, ताकि इस खूंखार जानवर के आतंक से मुक्ति मिल सके।

भेड़ियों की बढ़ रही संख्या और व्यवहार में भी दिख रहे बदलाव इलाके में डर पैदा कर रहे हैं।

भारत में भेड़ियों की संख्या

वन विभाग के 2023 के सर्वे के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भारतीय भेड़ियों की अनुमानित संख्या 300–350 के बीच है, जिनमें से करीब 40–50 तराई और बहराइच श्रावस्ती बेल्ट में हैं। सामान्य तौर पर भेड़िये चार पांच के झुंड बनकर रहते हैं और रात के समय शिकार करते हैं। अमूमन तौर पर भेड़िये हिरन, खरगोश, जंगली सूअर और पालतू बकरियों को निशाना बनाते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल सिमटने, सूखे और खेतों की ओर बढ़ते मानवीय दखल ने उनके भोजन साइकिल को बिगाड़ दिया है।

बहराइच में बच्चों को क्यों शिकार बना रहे भेड़िये

डॉ रविन्द्र कौशिक बताते है कि भेड़िये इंसानों को अपना नेचुरल शिकार नहीं मानते। लेकिन मांद में पानी भरने और कुत्तों की संख्या में गिरावट के चलते अब ये बच्चे जैसे कमजोर लक्ष्यों को आसान शिकार समझने लगे हैं। भेड़ियों का शिकार करने का पैटर्न बाकी जानवरों से अलग होता है। अमूमन तौर पर भेड़ियों का झुंड पहले दूर से निशाना तय करता है। लेकिन आजकल बस्तियों में भेड़िया अकेले और दबे पांव दस्तक देता है। भेड़िया अपने शिकार के गले या फिर सिर पर पहला वार करता है ताकि शिकार आवाज भी न निकाल सके। भेड़िया का शिकार करने का समय भी शाम या रात का होता है खासकर सूरज ढलने के बाद ये खेतों और झाड़ियों से शिकार के लिए निकलते है।

प्रशासन ने गांवों में डाला डेरा

बहराइच के भेड़िया के डर वाले गांवों में वन विभाग की टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। भेड़िया के मूवमेंट को ट्रेस करने के लिए खेतों के सहारे कैमरा ट्रैप और बड़े पिंजरे लगाए हैं। ड्रोन के जरिए भी इलाके में भेड़िए की तलाश की जा रही है। नेपाल सीमा से लगी नदियों के किनारे लगातार गश्त बढ़ाई गई है। बावजूद इसके, अब तक कोई भेड़िया पकड़ा नहीं जा सका है। प्रशासन ने लोगों से रात में अकेले न निकलने की अपील की है। बहराइच में भेड़िया का आतंक महज एक समस्या नहीं है बल्कि जंगलो के सिकुड़ने और इंसान और जानवरों के संघर्ष की शुरुआत है। अब जरूरत है कि वन विभाग समय रहते इन खूंखार शिकारियों पर करे नहीं तो इलाके के गांव वालों को और लंबा पहरा देना पड़ेगा।

Manish Yadav
मनीष यादवauthor

साल 2011 था जब इंद्रप्रस्थ से पत्रकारिता के सफर की सीढ़ियां चढ़ना शुरू किया । कुछ साल जयपुर रहा और अब ठिकाना अवध है। माइक पकड़ कर कोशिश करता हूं कि आम की आवाज खास के कानो तक पहुंचा पाऊं उम्मीद रहती है इससे हल निकलेगा ।

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