लखनऊ

जाम का झाम नहीं झेलेगा लखनऊ, बनने वाली है 10 KM लंबा एलिवेटेड रोड; अयोध्या-गोरखपुर का सफर होगा आसान

लखनऊ में अयोध्या और गोरखपुर की यात्रा को आसान बनाने के लिए पॉलिटेक्निक चौराहे से इंदिरा नहर तक 8-10 किमी लंबी एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। सेतु निगम को इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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(फाइल फोटो)

लखनऊ : राजधानी को जाम मुक्त बनाने की दिशा में काम चल रहा है। सरकार एक नया एलिवेटेड रोड जल्द ही बनाने जा रही है। यह एलिवेटेड रोड पॉलिटेक्निक चौराहे से इंदिरा नहर तक विकसित किया जाएगा, जिसकी लंबाई 8-10 किमी है। इस परियोजना से अयोध्या और गोरखपुर के बीच यात्रा आसान होगी। वर्तमान में इस स्ट्रेच पर रोजाना जाम की समस्या है, वाहनों की लंबी-लंबी कतारे लगती हैं, लेकिन इसके एलिवेटेड मार्ग के बनने से समस्या हल होगी।

सेतु निगम बनाएगा एलिवेटेड रोड

पॉलिटेक्निक से इंदिरा नहर के बीच कई अवैध कब्जे हैं, जिन्हें हटाया जाएगा। LDA अवैध कब्जे वाले हिस्सों को चिन्हित कर अतिक्रमण हटवाएगा। हाईकोर्ट ने एलिवेटेड रोड और मेट्रो रेल सेवा के लिए एकीकृत योजना बनाने के लिए दो माह का समय दिया है। एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया कि डीपीआर तैयार किया जाएगा। NHAI ने पॉलिटेक्निक से इंदिरा नहर तक का हिस्सा पीडब्ल्यूडी को रखरखाव के लिए सौंपा है। सेतु निगम को इस रूट पर एलिवेटेड रोड के निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी। इस रूट के बनने से शहर के ट्रैफिक में कमी आएगी। सीतापुर की तरफ से आने वाले वाहन सीधे इंजीनियरिंग कॉलेज फ्लाईओवर से अयोध्या रोड पहुंचेंगे।

लखनऊ में पॉलिटेक्निक चौराहे से इंदिरा नहर तक 8-10 किमी लंबा नया एलिवेटेड रोड बनेगा। यह परियोजना अयोध्या और गोरखपुर के बीच यात्रा को आसान बनाएगी और मौजूदा जाम की समस्या को हल करेगी। इस रूट के बनने से शहर के ट्रैफिक समस्या में कमी आएगी और लोगों का सफर काफी आसान होगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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