कोलकाता: भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो जल्द ही अपने ट्रैक पर दौड़ती नजर आएगी। हुगली नदी के नीचे भारत की पहली मेट्रो रेल लाइन का काम अपने अंतिम चरण में है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही सेवा शुरू हो सकती है। ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर हुगली नदी के नीचे से होकर गुजरा है। यह देश में इस तरह का पहला नदी पार मार्ग है। फिलहाल, इसके रूट के बीच पड़ने वाले 8 स्टेशनों पर मेट्रो ठहरेगी।
इन स्टेशनों को जोड़ रही ये परियोजना
साल 2008 में एक आदेश के बाद हावड़ा रेलवे स्टेशन और बिधाननगर को जोड़ने वाले ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मंजूरी दी गई थी। इस सुरंग का निर्माण दुनिया की बेहतरीन तकनीक का उपयोग करके किया गया है। जल्द ही इस मार्ग पर रेल यात्रियों के लिए रेल यात्रा शुरू की जाएगी। इसके शुरू होने से हावड़ा और सियालदह के बीच मेट्रो मार्ग सड़क मार्ग से यात्रा के समय को 1.5 घंटे के मुकाबले घटाकर 40 मिनट हो जाएगा। इससे दोनों छोर पर भीड़भाड़ भी कम होगी।हुगली नदी केनीचे बनी सुरंग
केएमआरसी के अनुसार, ईस्ट-वेस्ट मेट्रो की 16.6 किमी लंबाई में से हावड़ा मैदान और फूलबागान के बीच भूमिगत गलियारा 10.8 किमी का है, जिसमें सुरंग हुगली नदी के नीचे से गुजरती है, जबकि बाकी हिस्सा ऊंचा गलियारा है। रेलवे बोर्ड की सीईओ जया वर्मा सिन्हा ने मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक पी उदय कुमार रेड्डी और मेट्रो और कोलकाता मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हावड़ा मैदान से पूर्व के एस्प्लेनेड खंड का निरीक्षण किया। उन्होंने हावड़ा स्टेशन पर पूर्वी और दक्षिण पूर्वी रेलवे के साथ मेट्रो रेलवे के यात्री इंटरचेंजिंग पॉइंट की समीक्षा की।हावड़ा मैदान से एस्प्लेनेड तक ईस्ट-वेस्ट मेट्रो का 4.8 किलोमीटर लंबा हिस्सा अगले महीने तक जनता के लिए तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। वर्तमान में पूर्व-पश्चिम गलियारे का केवल सियालदह से साल्ट लेक सेक्टर V तक का हिस्सा चालू है।
