कानपुर

अब जापानी तकनीक से होगी खेती, कानपुर में एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाई जाएगी फसल, सफल होने पर होगा विस्तार

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 21, 2023, 03:12 PM IST

Japanese Agricultural Technology: कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) जापानी कृषि तकनीक का हब बनने वाला है। कानपुर में अब जापानी तकनीक से खेती की जाएगी। 2018 में हुए समझौते के तहत जापान के वैज्ञानिकों का एक प्रतिनिधिमंडल कानपुर सीएसए विवि पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कल्याणपुर स्थित शाकभाजी अनुसंधान केंद्र का भी दौरा किया। यहां उगाई जा रही सब्जियों के बारे में जानकारी ली।

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कानपुर में जापानी तकनीक से की जाएगी खेती

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • जापानी कृषि तकनीक का हब बनेगा कानपुर
  • जापानी तकनीक से की जाएगी खेती, कृषि यंत्र भी बनेंगे
  • जापान के वैज्ञानिकों ने दल कानपुर सीएसए पहुंचा

Japanese Agricultural Technology: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में अब जापानी तकनीक से खेती की जाएगी। यहां पहले करीब एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाएगी। इसके बाद तकनीक का फायदा मिलने पर इसे चार हेक्टेयर में बढ़ाया जाएगा। इसके बाद जापानी तकनीक को यूपी के मौसम के अनुरूप हर जनपद के छोटे-छोटे किसानों तक पहुंचाया जाएगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह और जापानी प्रतिनिधिमंडल के तकासी योशिका ने यह बात कही। एक समझौते के तहत जापान के वैज्ञानिकों का एक प्रतिनिधिमंडल कानपुर सीएसए विवि में आया। जापान सरकार के कृषि, वानिकी और मत्स्य मंत्रालय के काउंसलर के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह से जापानी तकनीक आधारित खेती के मॉडल फार्म के लिए जमीन और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता पर बातचीत की।

जापान सरकार के काउंसलर के अनुसार, गुजरात के आणंद जिले में एक मॉडल फार्म तैयार किया है। यहां जापानी कंपनियां खेती के साथ ही अपने कृषि उपकरण का निर्माण भी करेंगी। जिससे बड़े पैमाने पर निवेश के रास्ते खुलेंगे साथ ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा। जापान सरकार के साथ 2018 में यूपी सरकार ने कृषि तकनीक हस्तांतरण और निवेश का समझौता किया है।

मॉडल फार्म में जापानी बीजों और तकनीक के साथ फसलों का उत्पादन

कोरोना के कारण करार को लागू करने में देरी हुई, लेकिन अब जापान सरकार इसे जल्द पूरा करने के लिए तैयार है। जापान सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने सीएसए कुलपति, अधिष्ठाता, निदेशक और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ हुई बैठक में अपनी कार्य योजना पर चर्चा की। जापान सरकार के काउंसलर तकाशी योशीओका ने कहा कि मॉडल फार्म को विकासित करने के लिए एक हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी। मॉडल फार्म में जापानी बीजों और तकनीक के साथ फसलों का उत्पादन होगा। उत्तर प्रदेश की जलवायु एवं मिट्टी के अनुरूप सफलता मिलने पर इसे पांच हेक्टेयर में विस्तार किया जाएगा। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने विवि में विकसित विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल ने किया शाकभाजी अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण

इस दौरान जापान के प्रतिनिधिमंडल ने कल्याणपुर स्थित शाकभाजी अनुसंधान केंद्र का भी दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने हाइड्रोपोनिक सिस्टम के बिना पैदा की जा रही सब्जियों के बारे में जानकारी ली। डॉ. डीपी सिंह और डॉ. राम बटुक सिंह ने जापानी वैज्ञानिकों को सब्जियों की प्रजाति की जानकारी दी। साउथ एशिया जापान के निदेशक अबे इचिरो के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान करना है। जापान विकास कंपनी के सलाहकार डॉ. सुशील यामामोटा ने कहा कि यूपी में तकनीक का परीक्षण किया जाएगा।
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