Holi Special: होली का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। होली की तैयारी पूरे भारत में जोर-शोर से चल रही है। बाजारों में होली को लेकर खास रौनक देखाई दे रही है। रंग-बिरंगे गुलाल और रंग से बाजार सराबोर दिखाई देने लगे हैं। बाजार में कई तरह के रसायनिक रंग बिकने शुरू भी हो गए हैं। लेकिन इन रंगों से होने वाले नुकसान से बचाव को अब होली पर प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल का चलन बढ़ने लगा है। उत्तर प्रदेश के मथुरा के बाद कानपुर में सबसे ज्यादा लंबे समय तक होली खेली जाती है। यही कारण है कि यहां के कारोबारी ने गुलाल और अबीर बनाने में जुटे हैं। अबीर गुलाल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में कानपुर से ही बनकर जाता है।
आपको बता दें कि कानपुर में फूलों के रस और अरारोट में कलर मिलाकर गुलाल तैयार किया जाता है। यह गुलाल नेचुरल होता है। यह त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है। कानपुर में लाल, नीला, हरा, गुलाबी और भगवा रंग समेत कई रंगों के गुलाल तैयार होते हैं, हालांकि इस वर्ष भगवा रंग की मांग सबसे अधिक है।
