कानपुर

'बेअसर रही बाबा की फूंक': विरोध किया तो गुर्गों से पिटवाया; डॉक्टर की शिकायत पर कानपुर के करौली सरकार पर FIR

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 21, 2023, 08:10 AM IST

कानपुर पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं करौली सरकार का कहना है कि यह उनको और सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश है।

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करौली सरकार (फोटो सोर्स- इंस्टाग्राम/karauli.shankar)

Photo : टाइम्स नाउ ब्यूरो

Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में करौली सरकार उर्फ डॉ. संतोष सिंह भदौरिया के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। नोएडा के रहने वाले एक डॉक्टर ने उन पर मारपीट का आरोप लगाया है। डॉक्टर का दावा है कि करौली सरकार के चमत्कार का विरोध करने पर उन्होंने अपने गुर्गों से उसे पिटवाया और नाक की हड्डी भी तोड़ दी। डॉक्टर ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर अपनी व्यथा बताई, जिसके बाद इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि, करौली सरकार ने डॉक्टर के आरोपों को खारिज किया है।

बता दें, कानपुर में बिधनू स्थित लवकुश आश्रम के करौली सरकार झाड़फूंक और विशेष अनुष्ठान कराकर लोगों की समस्याएं दूर करने का दावा करते हैं। बाबा के दरबार में दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और अपनी समस्याएं उन्हें बताते हैं। करौली सरकार के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

22 फरवरी की है घटना

करौली सरकार के खिलाफ यह मामला 22 फरवरी का है। नोएडा के रहने वाले डॉ. सिद्धार्थ चौधरी का कहना है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर बाबा के कई वीडियो देखे थे। उनके चमत्कारों से प्रभावित होकर वह अपने पिता वीएस चौधरी, मां रेनू चौधरी और पत्नी प्रियंका चौधरी के साथ पिछले महीने 22 फरवरी को करौली सरकार का आशीर्वाद लेने उनके दरबार में पहुंचे थे। दावा है कि उन्होंने बाबा से मुलाकात के लिए 2600 रुपये की पर्ची भी कटवाई थी। इसके बाद वह शाम चार बजे बाबा के दरबार में पेश हुए थे।

बाबा के चमत्कार का नहीं हुआ असर

डॉक्टर सिद्धार्थ ने बताया कि बाबा के सामने पहुंचकर उन्होंने अपनी समस्याएं बताईं। इसके बाद बाबा ने माइक से फूंक मारते हुए ओम शिव बैलेंस बोला, लेकिन इसका मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। जब मैंने यह बात बाबा को बताई, तो उन्होंने दोबारा ओम शिव बैलेंस बोलकर फूंक मारी, लेकिन इस बार भी मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। यह बात मैंने बाबा को बताई, तो उन्होंने पगलैट कहते हुए अपने गुर्गों को इशारा किया, जिसके बाद वे मुझे एक कमरे में ले गए और मेरे साथ मारपीट की ओर नाक की हड्डी भी तोड़ दी।

पुलिस कमिश्नर से की शिकायत

डॉक्टर ने इस मामले में कानपुर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बाबा के दरबार के फोटो और वीडयो भी दिखाए हैं और बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। डॉ सिद्धार्थ चौधरी ने बाबा के सेवादारों के खिलाफ मारपीट और गालीगलौज का आरोप लगाया है। उधर, करौली सरकार का कहना है कि ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई है। उनको और सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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