Shimla News: हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर एक बार फिर चरम पर है। पिछले 24 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदी-नाले उफान पर हैं और जगह-जगह पहाड़ियों के दरकने का सिलसिला जारी है। सबसे ज्यादा असर कालका-शिमला नेशनल हाईवे-5 पर देखने को मिला है, जहां शिमला के पास स्थित वाकनाघाट में अचानक हुए भारी भूस्खलन के कारण सड़क का एक बड़ा हिस्सा मलबे की चपेट में आ गया।
वाकनाघाट के पास पहाड़ी से अचानक बड़े-बड़े पत्थर, उखड़े हुए पेड़ और भारी मलबा सीधे हाईवे पर आ गिरा। इस वजह से हाईवे की एक लेन पूरी तरह से बंद हो गई है और ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। राहगीरों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और मलबे को हटाकर रास्ता साफ करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
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मौसम विभाग ने जारी की सख्त चेतावनी
हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत कार्य में बड़ी रुकावट पैदा कर रही है। मौसम विभाग ने राज्य में बिगड़ते मौसम को देखते हुए सख्त चेतावनी जारी की है। प्रदेश के 7 प्रमुख जिलों—हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। आने वाले दिनों में भी चंबा, कांगड़ा और कुल्लू जैसे इलाकों में मूसलाधार बारिश की संभावना बनी हुई है।
बेहद जरूरी होने पर ही सफर करने की दी सलाह
वाकनाघाट में मौजूद ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण भूस्खलन का खतरा अभी टला नहीं है। प्रशासन ने शिमला और नेशनल हाईवे-5 की तरफ यात्रा करने वाले लोगों को सतर्क रहने और बेहद जरूरी होने पर ही सफर करने की सलाह दी है।
