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ज्योतिरादित्य सिंधिया का अनोखा अंदाज: चौपाल में महिलाओं के लोकगीत पर झूमकर जीता सबका दिल

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रायश्री गांव में आयोजित ग्राम चौपाल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर अपने अलग अंदाज से सबका दिल जीत लिया।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया का अनोखा अंदाज

Photo : Twitter

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रायश्री गांव में आयोजित ग्राम चौपाल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर अपने अलग अंदाज से सबका दिल जीत लिया। वे गांव वालों से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान गांव की महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाए, जिन्हें सुनकर सिंधिया इतने खुश हुए कि वे खुद को रोक न सके और झूम उठे। उनकी यह सादगी और उत्साह देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

चौपाल में महिलाओं के प्रदर्शन से प्रभावित होकर सिंधिया ने एक खास पहल की। उन्होंने अपने हाथों से पकौड़े परोसकर सभी महिलाओं को खिलाए। यह नजारा ग्रामीणों के लिए यादगार बन गया। आमतौर पर बड़े नेताओं को औपचारिक अंदाज में देखने वाले ग्रामीणों के लिए यह एक नया अनुभव था। सिंधिया का यह व्यवहार उनकी जनता से जुड़ाव की भावना को दर्शाता है। महिलाओं ने भी उनकी इस दरियादिली की जमकर तारीफ की और कहा कि ऐसा लगता है जैसे वे उनके परिवार का हिस्सा हों।

समस्याएं सुनने और सरकार की योजनाओं को पहुंचाने को चौपाल का आयोजन

ग्राम चौपाल का आयोजन ग्रामीणों की समस्याएं सुनने और सरकार की योजनाओं को पहुंचाने के लिए किया गया था। इस दौरान सिंधिया ने गांव वालों से उनकी परेशानियां जानीं और उन्हें सरकारी योजनाओं के बारे में बताया। लेकिन उनका लोकगीतों पर झूमना और पकौड़े परोसना इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बन गया। ग्रामीणों ने कहा कि सिंधिया का यह अंदाज उन्हें बाकी नेताओं से अलग करता है।

इससे पहले गुना के दौरे पर थे सिंधिया

इससे पहले 31 मार्च को मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र मध्य प्रदेश के गुना के दौरे पर थे। उन्होंने यहां भी आम जनता की समस्याओं को सुना था और प्रशासन को उनके निराकरण के निर्देश दिए थे। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुना के बमोरी का भी दौरा किया था। यहां पर उन्होंने आम जनता से सीधे संवाद किया था। इस दौरान क्षेत्र के लोगों ने अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं थीं, जिस पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे संबंधित लोगों की समस्याओं का जल्दी निराकरण करें।

केंद्रीय मंत्री आदिवासियों के बीच पहुंचकर उनके ही रंग में रंग गए थे। उन्होंने आदिवासियों के साथ जमकर नृत्य किया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, ''आदिवासी संस्कृति की झलक- प्रेम, उत्सव और अपनापन।''

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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