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JNU में तोड़फोड़ पर सख्त कार्रवाई, JNUSU अध्यक्ष समेत 5 छात्र नेता सस्पेंड

जेएनयू प्रशासन ने लाइब्रेरी में तोड़फोड़ के मामले में कड़ा कदम उठाते हुए जेएनयूएसयू के चार वर्तमान और एक पूर्व पदाधिकारी को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया है।

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JNU ने तोड़फोड़ के लिए JNUSU पदाधिकारियों को रस्टिकेट किया

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में नवंबर 2025 में हुए तोड़फोड़ मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) के पदाधिकारियों को निष्कासित कर दिया है। जेएनयू के चीफ प्रॉक्टर की ओर से जारी आदेश के अनुसार, छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोइपका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश को दो सेमेस्टर के लिए विश्वविद्यालय से निष्कासित (रस्टिकेट) किया गया है।

कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकेंगे छात्र नेता

प्रशासन ने सभी आरोपित छात्रों पर “आउट ऑफ बाउंड्स” आदेश भी लागू किया है, जिसके तहत वे कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे 10 दिनों के भीतर जमा करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति इन छात्रों को कैंपस में शरण देता पाया गया तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

20 लाख का हुआ था नुकसान

यह आदेश प्रॉक्टोरियल इन्क्वायरी कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 नवंबर 2025 को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने डॉ. भीमराव आंबेडकर लाइब्रेरी में लगे करीब 20 लाख रुपये की लागत वाले फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी आधारित एक्सेस गेट्स को नुकसान पहुंचाया। जांच में सामने आया कि छात्रों ने कैंची से तार काटे, कैमरे उखाड़े, पैनल तोड़े और सुरक्षा कर्मियों की अपीलों को नजरअंदाज किया।

भड़काऊ भाषण का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने न सिर्फ तोड़फोड़ की बल्कि मलबे पर खड़े होकर भड़काऊ भाषण दिए, नारेबाजी की और लाइब्रेरी की गतिविधियों को बाधित किया। सुरक्षा गार्ड्स को डराने-धमकाने के भी आरोप लगाए गए हैं, जिसमें दो महिला गार्ड्स के घायल होने और खून बहने की बात कही गई है। प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम को “पूर्व नियोजित हमला” करार दिया है और कहा है कि सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से किसी भी तरह का पश्चाताप नहीं दिखाया गया। जेएनयू प्रशासन के इस फैसले के बाद कैंपस में एक बार फिर छात्र राजनीति और अनुशासन को लेकर बहस तेज हो गई है।

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शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

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