जयपुर

Jaipur News: डिस्कॉम प्रबंधन का एक्शन, FRT पर 13 लाख रुपए की लगी पेनल्टी

जयपुर डिस्कॉम प्रबंधन ने विद्युत उपभोक्ताओं की 'नो करंट' शिकायतों के समाधान में लगी फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम (एफआरटी) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 13 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई है।

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(सांकेतिक फोटो-Istock)

जयपुर : डिस्कॉम प्रबंधन ने विद्युत उपभोक्ताओं की 'नो करंट' की शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरतने के लिए फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम (एफआरटी) पर 13 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई है। यह कार्रवाई सेवा प्रदाता कंपनी मैसर्स संधा एंड कंपनी के खिलाफ की गई है। डिस्कॉम की सीएमडी आरती डोगरा के निर्देश पर हाल ही में किए गए निरीक्षण में एफआरटी के कई वाहनों में जीपीएस, सुरक्षा उपकरण और स्मार्टफोन की कमी पाई गई। इसके अलावा, वाहनों में कर्मचारियों की कमी और यूनिफॉर्म में न होने की भी शिकायतें मिलीं।

बड़ी पेनल्टी

डिस्कॉम ने प्राइवेट कंपनी को शिकायतों के समाधान के लिए ठेका दिया है, लेकिन एफआरटी समय पर समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है, जिससे उपभोक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह पहली बार है जब 2016 से संचालित इस व्यवस्था के तहत इतनी बड़ी पेनल्टी लगाई गई है। 8 जुलाई को 340 एफआरटी वाहनों की आकस्मिक जांच में पाई गई कमियों के आधार पर पेनल्टी लगाई गई।

पेनल्टी में प्रति एफआरटी 1500 रुपए, टीम के सदस्यों की कमी पर 200 रुपए प्रति सदस्य और यूनिफॉर्म एवं आईडी कार्ड की अनुपस्थिति पर 200 रुपए प्रति सदस्य शामिल हैं। एफआरटी की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी आईटी विंग के अधीक्षण अभियंता और ओएंडएम विंग के इंजीनियरों पर है, लेकिन फील्ड इंजीनियरों की मिलीभगत के कारण जांच में लापरवाही बरती जा रही है। डिस्कॉम ने सभी अधीक्षण अभियंताओं को निर्देश दिए हैं कि सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकर लगाना सुनिश्चित करें।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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