जयपुर

जयपुर में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत गिरी; रेस्क्यू में मिली सिर्फ ये चीज

Jaipur Building Collapse News: जयपुर के जवाहर नगर इलाके में मामा होटल के बाद निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत गिर गई। इमारत गिरने से यहां 4 से 5 लोगों के मलबे में दबने की सूचना थी, लेकिन रेस्क्यू में सिर्फ एक स्कूटी ही मिली है।

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जयपुर में निर्माणाधीर इमारत गिरी।

Photo : Times Now Digital

Jaipur Building Collapse News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में बड़ा हादसा हुआ है। यहां के जवाहर नगर इलाके में मामा होटल के बाद निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत गिर गई थी। इमारत गिरने से यहां 4 से 5 लोगों के मलबे में दबने की सूचना मिली थी। इसके अलावा इमारत के पास खड़े कई वाहन भी दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही सिविल डिफेंस और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंची थी। राहत बचाव कार्य के दौरान टीम को महज एक स्कूटी दबी मिली, किसी शख्स के दबे होने की सूचना गलत साबित हुई।

जवाहर नगर में यह घटना करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके की बिजली सप्लाई रोक दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह इमारत निर्माणाधीन थी और गुरुवार को इस इमारत क दीवार में दरार आ गई थी, जिस कारण यह पूरी बिल्डिंग गिर गई। वहीं, हादसे के समय इमारत के अंदर कितने लोग से इसका पता लगाया जा रहा था। सुबह चार बजे तक चले बचाव व राहत कार्य में सिर्फ एक स्कूटी ही मिली।

कई अधिकारी मौके पर

घटना के बाद कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। जानकारी के मुताबिक, हेरिटेज निगम के अधिकारी, आदर्श नगर जोन उपायुक्त युगांतर शर्मा, एक्सईएन सुबोध कुमार, सतर्कता उपायुक्त पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ सहित अन्य अधिकारी मौजूद हैं। SDRF ने रेस्क्यू एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है ।एक बाइक और एक्टिवा मलबे में दबी मिली हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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