कोरोना महामारी के बाद कई लोग सिर दर्द, बेचैनी और सीने में दर्द जैसे लक्षणों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की समस्या बढ़ रही है। इसके पीछे बदलती जीवनशैली, शराब और तंबाकू का सेवन, मानसिक तनाव, और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसे कारक जिम्मेदार हैं। युवा वर्ग भी पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता, डिप्रेशन, सरकारी नौकरी न मिलने और पारिवारिक तनाव के कारण इस बीमारी की चपेट में आ रहा है।
राजस्थान के प्रमुख शहरों, जैसे जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, सवाईमाधोपुर, चित्तौड़गढ़, झुंझुनूं और श्रीगंगानगर में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या अधिक देखी जा रही है। एसएमएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अनुसार, गंभीर हालत में भर्ती होने वाले हर चौथे-पांचवें मरीज को उच्च रक्तचाप की समस्या होती है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में उच्च रक्तचाप की प्रसार दर करीब 22.6% है, जिसमें पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है और शहरी क्षेत्रों में यह अधिक देखा जाता है।
क्या है साइलेंट किलर?
सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg से कम होता है, जबकि 140/90 mmHg या उससे अधिक को उच्च रक्तचाप माना जाता है। इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि यह बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। इस साल की थीम ‘अपने रक्तचाप को सटीक रूप से मापें, उसे नियंत्रित रखें और लंबा जीवन जिएं’ है। समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
विश्व हाइपरटेंशन डे का महत्व
विश्व हाइपरटेंशन डे 17 मई को मनाया जाता है। इस विशेष दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के जोखिमों और इसकी जटिलताओं के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, इसके रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी प्रदान करना भी इसका अहम हिस्सा है। यह दिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सीमित नमक सेवन जैसी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। हर साल इस अवसर पर एक विशिष्ट थीम निर्धारित की जाती है, जो जागरूकता बढ़ाने में सहायक होती है।
