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जयपुर में अरावली बचाने के नाम पर प्रदर्शन, पर्यावरण से ज़्यादा राजनीति और उकसावे पर उठे सवाल

कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज के बेटे कार्तिकेय के नेतृत्व में Gen Z मार्च, अमर जवान ज्योति पर प्रदर्शन और नोट उड़ाने–जलाने से बढ़ा विवाद। जयपुर में अरावली बचाने के नाम पर Gen Z का प्रदर्शन चर्चा में। शहीदों का भी हुआ अपमान।

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जयपुर में अरावली बचाने के नाम पर प्रदर्शन, पर्यावरण से ज़्यादा राजनीति और उकसावे पर उठे सवाल

जयपुर में बुधवार को अरावली बचाने के नाम पर एक ऐसा प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने पर्यावरण संरक्षण से ज़्यादा राजनीतिक मंशा और युवाओं को उकसाने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।खुद को Gen Z बताने वाले बड़ी संख्या में युवा हाथों में बैनर और झंडे लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन के दौरान सरकार पर सीधे-सीधे आरोप लगाए गए। आरोप था कि सरकार अरावली क्षेत्र में खनन को बढ़ावा देकर एक खास उद्योगपति को फायदा पहुंचा रही है।

हालांकि, प्रदर्शन की तीव्रता और आरोपों से ज़्यादा जिस बात ने चर्चा को जन्म दिया, वह था इस आंदोलन का नेतृत्व और राजनीतिक पृष्ठभूमि।

“Gen Z की आवाज़ या राजनीतिक स्क्रिप्ट?”

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह प्रदर्शन वास्तव में युवाओं की स्वतःस्फूर्त आवाज़ था, या फिर Gen Z के नाम पर कोई राजनीतिक स्क्रिप्ट पढ़ी जा रही थी?

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज के बेटे कार्तिकेय भारद्वाज, जो सांगानेर विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ चुके पुष्पेंद्र भारद्वाज के पुत्र हैं। उनके साथ नेतृत्व में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रहे रौनक खत्री भी शामिल थे।

नेपाल में हालिया हिंसा के बाद जिस तरह Gen Z प्रोटेस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया, उसी के तुरंत बाद जयपुर में Gen Z के नाम पर इस प्रदर्शन को जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इसी पहचान का इस्तेमाल कर जयपुर में युवाओं को उकसाने और राजनीतिक दिशा देने की कोशिश की गई?

“पर्यावरण संरक्षण या राजनीतिक हथियार?”

अरावली का संरक्षण एक गंभीर और ज़रूरी मुद्दा है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या इस उद्देश्य के लिए युवाओं को सड़कों पर उतारकर उन्हें राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना सही है? क्या Gen Z का मतलब सिर्फ नारे, आरोप और टकराव तक सीमित कर दिया गया है? या फिर युवाओं की ऊर्जा को जानबूझकर राजनीतिक टकराव की ओर मोड़ा जा रहा है?

“अमर जवान ज्योति पर प्रदर्शन ने बढ़ाया विवाद”

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। यह प्रदर्शन जाकर समाप्त हुआ अमर जवान ज्योति पर, जिसे देश अपने शहीदों का स्मारक मानता है।आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल कुछ Gen Z युवाओं ने जूते पहनकर स्मारक पर चढ़ने की कोशिश की। अमर जवान ज्योति वह स्थान है, जहां हर भारतीय सिर झुकाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देता है। ऐसे संवेदनशील स्थल पर इस तरह का आचरण सेना, जवानों और शहीदों के सम्मान से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करता है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज़ हो गई है कि क्या विरोध के नाम पर शहीदों के स्मारकों की मर्यादा को नजरअंदाज किया जा सकता है।

“नोट उड़ाना और जलाना: विरोध या अपमान?”

इतना ही नहीं, प्रदर्शन के दौरान नोट उड़ाने और कुछ जगहों पर नोट और सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर को जलाया भी गया। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह विरोध का तरीका है या फिर राष्ट्रीय प्रतीकों और मुद्रा का अपमान? इन घटनाओं ने प्रदर्शन को पर्यावरण आंदोलन से ज़्यादा विवादों के केंद्र में ला दिया है।

“Gen Z भविष्य है, राजनीति का मोहरा नहीं”

पर्यावरण बचाने के नाम पर अगर युवाओं को भड़काया जाएगा, उकसाया जाएगा और राजनीतिक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जाएगा, तो सवाल सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि उन नेताओं से भी है जो Gen Z के नाम पर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं।

जयपुर का यह प्रदर्शन अरावली से ज़्यादा Gen Z के नाम पर चल रही राजनीति को उजागर करता नज़र आया। Gen Z गुस्सा नहीं, Gen Z भविष्य है। और भविष्य को उकसावे नहीं, दिशा चाहिए। लेकिन जयपुर का यह मशाल प्रदर्शन कई लोगों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित और Gen Z युवाओं को उकसाने वाला लगा।

Lakhveer Singh Shekhawat
लखवीर सिंह शेखावतauthor

पत्रकारिता में पिछले सात साल से सक्रिय हैं, वर्तमान में Times Now नवभारत में राजस्थान ब्यूरो हेड हैं। इससे पहले, ज़ी मीडिया और न्यूज़18 नेटवर्क के राजस्थान चैनल के लिए दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया है। उन्होंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी में डिग्री हासिल की है। राजस्थान से संबंधित समाचारों और ख़बरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। साथ ही देश की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को कवर करने में भी विशेषज्ञता हासिल है।

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