नोएडा और ग्रेटर नोएडा कई लोगों के लिए सपनों के शहर हैं। यहां अपने घर का सपना पूरा करने के लिए लोग अपने जीवनभर की कमाई झौंक देते हैं। लेकिन कभी वह बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में पैसा फंसा कर ठगे जाते हैं तो कभी अवैध कॉलोनियों में घर या प्लॉट लेकर। अगर आपने भी ग्रेटर नोएडा की किसी कॉलोनी में प्लॉट का घर लिया है या लेने की योजना बना रहे हैं तो एक बार ये खबर जरूर पढ़ लें। क्योंकि प्राधिकरण का बुल्डोजर अवैध कॉलोनियों में जमकर गरज रहा है। हमारी तो सलाह है कि अवैध कॉलोनियों में घर या जमीन न खरीदें। जब भी प्रॉपर्टी में निवेश करें तो अच्छे से जांच-परख कर लें।
कल यानी बुधवार 28 जनवरी को ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हैबतपुर के पास हिंडन के डूब क्षेत्र में अवैध कॉलोनी को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। इस तरह से बुधवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने हिंडन के डूब क्षेत्र में 6 हजार स्क्वायर मीटर जमीन को कब्जा मुक्त करवाया। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के परियोजना व भूलेख विभाग की तरफ से यह कार्रवाई की गई।
अथॉरिटी के ACEO सुमित यादव के अनुसार NGT ने आदेश दिया था कि हिंडन के डूब क्षेत्र में अतिक्रमण खत्म किया जाए। NGT के आदेश के अनुसार प्राधिकरण की ओर से लगातार जमीन को अवैध कब्जा मुक्त करवाने की कार्रवाई की जा रही है।
ज्ञात हो कि हैबतपुर में खसरा नंबर 280 और 287 की करीब 6 हजार स्क्वायर मीटर जमीन हिंडन के डूब क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह क्षेत्र प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में भी आता है। यही कारण है कि परियोजना विभाग के वर्क सर्किल-3 की टीम ने पुलिस की मदद से यहां अवैध निर्माण ध्वस्त किए।
वर्क सर्किल-3 के प्रभारी राजेश कुमार, मैनेजर रोहित गुप्ता और अन्य ने बुलडोजर की मदद से लगभग दो घंटे तक अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार यहां पर अवैध कॉलोनी बसाने का काम किया जा रहा था।
बता दें कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में काफी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा है। अवैध कब्जे की सबसे ज्यादा घटनाएं ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में ही सामने आती हैं। क्षेत्र के कई गांवों में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन कब्जाई गई है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के शाहबेरी सहित कई गांव इसमें शामिल हैं।
हाल के समय में यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम आगे बढ़ने के साथ ही अवैध अतिक्रमण भी तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र में कम से कम 35 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की जा चुकी हैं।
