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इस हफ्ते पूरा हो जाएगा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग पर सुरंग का काम, जानें किन इलाकों को होगा फायदा

Rishikesh-Karnprayag Rail Project: उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों को रेल कनेक्टिविटी देने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का काम अंतिम चरण पर चल रहा है। इस प्रोजेक्ट में 14.08 किमी की देश की सबसे लंबी सुरंग बनाई जा रही है। जिसकी खुदाई का काम इस हफ्ते शुक्रवार को पूरा हो जाएगा। इस परियोजना के पूरे होने से क्या-क्या लाभ मिलेगा, आइए जानते हैं?

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना

Rishikesh-Karnprayag Rail Project: देश की सबसे लंबी सुरंग वाला ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम दौर में है। इस परियोजना के तहत 14.08 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है। जिसकी खुदाई का काम इस हफ्ते पूरा हो जाएगा। यह सुरंग इस परियोजना की सबसे जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हिस्सा थी, जिसे लगभग पूरा कर लिया गया है। जिसके बाद इस ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को गति मिलेगी।

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों को मिलेगी कनेक्टिविटी

केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना 125.20 किमी लंबी होगी। यह परियोजना उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों को रेल संपर्क से जोड़ेगी। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट के तहत 105 किमी लंबी सुरंगें बनाई जा रही हैं। जिसमें देवप्रयाग-जनासू सेक्शन पर 14.08 किलोमीटर की देश की सबसे लंबी सुरंग की खुदाई हो रही है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा। दिसंबर 2026 तक इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दो भागों में बन रही सुरंग

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट में देवप्रयाग-जनासू सेक्शन पर बनाई जा रही सुरंग की खुदाई का काम सबसे जटिल है। इस सुरंग का निर्माण दो भागों में किया जा रहा है। इसमें मुख्य सुरंग से ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। वहीं दूसरी सुरक्षा सुरंग होगी, जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जाएगा। दोनों सुरंगें प्रत्येक 500 मीटर पर जुड़ी रहेंगी। इसके लिए क्रास रोड बनाई जा रही हैं।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना से लाभ

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों को भी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इस परियोजना के पूरा होने से तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा आसान और आरामदेह हो जाएगी। साथ ही इससे आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खुलेंगे। इसके अलावा किसी आपदा की स्थिति में रेल मार्ग से सहायता पहुंचने में भी आसानी होगी। इस रेल परियोजना के पूरे होने पर 125 किमी की दूरी को केवल 2 से ढाई घंटे में ही तय कर लिया जाएगा। अभी यह दूरी सड़क मार्ग से 7 से 8 घंटे में तय की जाती है। इस रेल परियोजना से तीर्थयात्रियों को बद्रीनाथ जैसे पवित्र स्थलों तक जाने में आसानी होगी। इसके अलावा उत्तराखंडमें आए दिन भूस्खलनऔरबाढ़जैसी प्राकृतिकआपदाएंआतीरहतीहैं। ऐसे में रेलमार्गके माध्यम से राहतऔरबचावकार्यतेजीसे हो सकेगा। इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा। यह रेल परियोजना सामरिक दृष्टि काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही इससे उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तक कनेक्टविटी भी आसान हो जाएगी।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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