भारत को युवाओं का देश कहा जाता है। किसी भी देश का भविष्य उस देश के युवाओं से होती है। लेकिन क्या हो जब इन्हीं युवाओं के सपनों के बीच इनकी कमियों को लाया जाए। ऐसे में हार मानकर बैठना से अच्छा है कि एक बार कोशिश कर लेनी चाहिए। इसी कोशिश से मिली कामयाबी के सबसे बड़ी मिशाल हैं गुजरात के रहने वाले एक शख्स, जिनकी हाइट कम होने की वजह से उनके सपने को कुचलने की पूरी कोशिश की गई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
हर साल देश में हजारों-लाखों लोग मेडिकल की पढ़ाई करते हैं। ऐसा ही कुछ करना चाहते थे गुजरात के भावनगर के रहने वाले गणेश बरैया। वह मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेकर पढ़ाई करना चाहते थे। लेकिन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को उनपर भरोसा नहीं था कि वह डॉक्टर बन पाएंगे। उन्हें लगता था कि वह डॉक्टर बनने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उनकी लंबाई सिर्फ तीन फीट है। लेकिन गणेश ने हार नहीं मानी। उनके अंदर के डॉक्टर बनने की जिद ने उन्हें रुकने नहीं दिया। एमसीआई के अस्वीकृति के बाद, उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी और आज वह एक एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर हैं।
साल 2018 में नहीं मिला एडमिशन
आपको बता दें कि गणेश बरैया ने साल 2018 में मेडिकल कोर्स के लिए अप्लाई किया था। जिसमें एमसीआई समिति ने उनकी हाइट का हवाला देते हुए एडमिशन देने से मना कर दिया। जिसके बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि ”समिति ने कहा कि मैं अपनी हाइट की वजह से आपातकालीन मामलों को संभाल नहीं पाऊंगा।”
कोर्ट में मामले को दी चुनौती
एमसीआई से अस्वीकृति के बाद उन्होंने अपने स्कूल के प्रिंसिपल और अपने शुभचिंतकों से बात की और उसके बाद इस मामले को चुनौती देने का फैसला लिया। जिसके बाद यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में पहुंचा और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई।
अब बन गए डॉक्टर
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में इसपर फैसला सुनाया, जिससे उन्हें भावनगर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। बरैया ने बताया कि " मुझे 1 अगस्त 2019 में एडमिश मिल गया और अब हाल ही मैनें अपना कोर्स पूरा कर एमबीबीएस की डिगी हासिल की है। अब मैं भावनगर के सर टी जनरल अस्पताल में काम कर रहा हूं।"
