Yamuna Authority Plan: यमुना प्राधिकरण के क्षेत्र में बसने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। यमुना प्राधिकरण के क्षेत्र में भविष्य में पीने के पानी की समस्या आड़े नहीं आएगी। यमुना अथॉरिटी की योजना के पहले चरण में गौतमबुद्धनगर जिले के 96 गांवों के तालाब और वाटर बॉडी आ रहे हैं। इन सभी गावों को पर्यटन स्थल बनाने के लिए प्राइवेट संगठनों के साथ गठबंधन किया गया है। इतना ही नहीं आईआईटी मुंबई गांव वालों को अंग्रेजी भाषा सिखाने का काम भी करेगी।
बता दें कि, यमुना अथॉरिटी ने दो प्राइवेट संगठनों और आईआईटी मुंबई के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों प्राइवेट संगठन तालाबों का पानी पीने योग्य बनाएंगे। तालाब के गिरते जल स्तर को संवारा जाएगा। वहीं, आईआईटी मुंबई ग्रामीणों को अंग्रेजी भाषा सिखाने का काम करेगी। प्राइवेट संगठन यमुना अथॉरिटी एरिया के मास्टर प्लान के अनुसार, प्राधिकरण क्षेत्र के 96 तालाब और अन्य वाटर बॉडी का सुंदरीकरण करेंगे।
भूजल दोहन को बचाना जरूरी
यमुना प्राधिकरण की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इन गांवों में काम की शुरूआत 15 जनवरी से की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में प्राइवेट संगठनों के साथ आईआईटी मुंबई भी शामिल हैं। यह प्राइवेट संगठन आईआईटी मुंबई के साथ मिलकर हिमाचल समेत देश के 7 शहरों में पहले भी काम कर चुके हैं। प्राधिकरण से मिली जानकारी के मुताबिक, जिस तरह तेजी के साथ विकास चल रहा है, उसी गति से भूजल का भी प्रयोग अधिक किया जा रहा है। भूजल दोहन को बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
96 गावों में होंगे ये प्रमुख कार्य
यमुना प्राधिकरण के अनुसार, 15 जनवरी से गांवों के तालाबों की गाद साफ की जाएगी। तालाबों की पटरी पर पौधे लगाए जाएंगे। पर्यटन स्थल के रूप में तालाबों को विकसित करने का काम किया जाएगा। तालाब के चारों तरफ मखमली घास लगाई जाएगी। गांव का पानी और बरसात का पानी छनके आए, इसके लिए कई हाईटेक उपाय किए जाएंगे। कई तरह की मछलियों को तालाबों में छोड़ दिया जाएगा। आईआईटी मुंबई गांवों में स्किल डेवलपमेंट का काम किया करेगी। आईआईटी मुंबई की ओर से गांव वालों को अंग्रेजी की शिक्षा दी जाएगी।
