ग्रेटर नोएडा

NCR के इन शहरों में पानी के लिए मचा हाहाकार, बिजली विभाग ने किया काम खराब; 15 लाख लोग परेशान

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और नोएडा के 15 लाख लोगों के लिए पानी संकट हो सकता है। हाल ही में गंगाजल प्लांट का बिजली कनेक्शन 3.50 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान के चलते काट दिया गया है। बिना बकाया चुकाए, गंगाजल की आपूर्ति फिर से शुरू करना संभव नहीं होगा। इस संकट से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?

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पानी की किल्लत (फाइल फोटो)

Photo : iStock

गाजियाबाद और नोएडा के निवासियों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में लगभग 15 लाख लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि, गंगाजल प्लांट का बिजली कनेक्शन विद्युत विभाग द्वारा काटा गया है। यह कार्रवाई 3.50 करोड़ रुपए के बकाया बिल के कारण की गई। चीफ इंजीनियर जोन 1, अशोक सुंदरम ने बताया कि विभागों को लंबे समय से बिजली भुगतान के लिए नोटिस जारी किए गए थे। पहले बकाया 8.50 करोड़ रुपए था, नगर निगम ने दिवाली से जनवरी तक 5 करोड़ रुपए का भुगतान किया। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।

इन जगहों पर बाधित होगी पानी की सप्लाई

बिजली कटौती के कारण ट्रांस हिंडन, सिद्धार्थ विहार और नोएडा में गंगाजल की आपूर्ति बाधित हो गई है। लोगों को पानी स्टोर करके काम चलाना पड़ रहा है, और अपार्टमेंट और सोसाइटी में टैंकरों की मांग बढ़ने की आशंका है। बिजली विभाग मार्च के अंत तक बकाया वसूली के लिए विभागों से संपर्क में है। लिखित आश्वासन मिलने पर कनेक्शन बहाल किया जा सकता है। नोएडा प्राधिकरण की तरफ से इस मामले में क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना बाकी है।

बिजली विभाग मार्च के अंत तक बकाया वसूली के लिए प्रयासरत है, और कनेक्शन बहाल करने के लिए लिखित आश्वासन की आवश्यकता है। नोएडा प्राधिकरण की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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