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पूर्वांचल को तोहफा: 12 घंटे में गोरखपुर से दिल्ली पहुंचाएगी Sleeper Vande Bharat ट्रेन, जानें स्टाप और टाइमिंग

Gorakhpur New Delhi Sleeper Vande Bharat : पूर्वोत्तर रेलवे के प्रस्ताव के मुताबिक, सप्ताह में तीन दिन स्लीपर वंदे भारत चलाई जा सकती है। ये गोरखपुर से नई दिल्ली तक का सफर 12 घंटे में तय करेगी।

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नई दिल्ली गोरखपुर स्लीपर वंदे भारत

Photo : BCCL

Gorakhpur New Delhi Sleeper Vande Bharat : भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए कई हाईस्पीड ट्रेनों को पटरियों पर दौड़ाने की सोच रहा है। अपनी स्पीड और खास सुविधा के लिए फेमस वंदे भारत को अब नए कलेवर में उतारने का प्रयास है। इसी कड़ी में पूर्वोत्तर रेलवे ने गोरखपुर सेनई दिल्ली के मध्य स्लीपर वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव तैयार किया है। पिछले दिनों इस प्रस्ताव के लिए जयपुर में आईआरटीटीसी की बाकायदा बैठक की गई है। बैठक में पूर्वोत्तर रेलवे के प्रस्ताव के मुताबिक, सप्ताह में तीन दिन स्लीपर वंदे भारत चलाई जा सकती है। ये गोरखपुर से नई दिल्ली तक का सफर 12 घंटे में तय करेगी।

नई दिल्ली से गोरखपुर के लिए जो वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलेगी। यह ट्रेन नई दिल्ली स्टेशन से रात 10:00 बजे चलेगी और गोरखपुर में सुबह 10:00 बजे पहुंच जाएगी। गोरखपुर से दिल्ली तक का सफर सिर्फ 12 घंटे में पूरा होगा। लंबे समय से गोरखपुर से नई दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन की मांग की जा रही थी। फिलहाल, पूर्वांचल के लोगों के लिए गोरखपुर से प्रयागराज तक एक वंदेभारत ट्रेन चलती है।

उधर, देश की पहली स्लीपर वंदे भारत गोरखपुर से आगरा के बीच चलने वाली है। ट्रेन के संचालन को लेकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। गोरखपुर से आगरा तक चलने वाली स्लीपर वंदे भारत का नंबर गोरखपुर से 22583 और आगरा से 22584 हो सकता है। सप्ताह में 6 दिन चलने वाली यह गाड़ी गोरखपुर से शाम 7 बजे चलकर बाराबंकी, ऐशबाग (लखनऊ) कानपुर सेंट्रल, इटावा में स्टापेज लेते हुए सुबह आगरा फोर्ट पहुंचेगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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