गाजियाबाद

Rapid Rail: 4 राज्यों के लिए आया रफ्तार का पैगाम, रैपिड रेल दौड़ेगी दिल्ली, यूपी, हरियाणा टू राजस्थान

Rapid Rail: दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना (Delhi-Meerut Rapid Rail Project) के अलावा हरियाणा और राजस्थान के एनसीआर रीजन में रैपिड रेल चलाने की योजना बनाई गई है। एनसीआर-2032 परिवहन कार्यात्मक प्लान के तहत इन राज्यों तक आरआरटीएस का विकास करना है। आइये जानते हैं कि रैपिड रेल परियोजना किन शहरों तक यात्रा आसान करेगी?

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नमो भारत ट्रेन

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Rapid Rail: नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब सिर्फ दिल्ली से मेरठ तक नहीं कुल 4 राज्यों में इस परियोजना को उतारने का प्लान बनाया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) ने एनसीआर-2032 के परिवहन पर कार्यात्मक योजना तैयार की है। नई योजना ते मुताबिक, यूपी के हापुड़ और खुर्जा तक आरआरटीएस (RRTS) की पहुंच बढ़ाने पर विचार किया है। एनसीआर क्षेत्र में रेल आधारित कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए एनसीआर के विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों को सेमी-हाई स्पीड रेल (Semi Highspeed Rail) आधारित कम्यूटर ट्रांजिट सिस्टम से जोड़ने के लिए कुल 8 क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जिसमें पहला दिल्ली से रेवाड़ी-अलवर, दूसरा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ, तीसरा दिल्ली-सोनीपत-पानीपत, चौथा दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-पलवल, पांचवा दिल्ली बहादुरगढ़-रोहतक, छठा दिल्ली-शाहदरा-बड़ौत, सातवां गाजियाबाद-खुर्जा और आठवां गाजियाबाद-हापुड़ शामिल है।

  • दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ (Delhi-Ghaziabad-Meerut Rapid Rail)
  • दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर (Delhi-Gurugram-Alwar Rapid Rail)
  • दिल्ली-पानीपत (Delhi-Panipat Rapid Rail)

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Ghaziabad-Meerut RRTS Corridor)

तीन कॉरिडोर में से 82.15 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर को मार्च 2019 में मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन को अब साहिबाबाद-दुहाई से आगे बढ़ाने के प्लान पर मुहर लग गई है। आरआरटीएस के मुताबिक, परियोजना का कार्य मेरठ (दक्षिण) स्टेशन पर काम पूरा हो चुका है। निर्माणाधीन आरआरटीएस परियोजना 82 किमी तक फैली हुई है और इसका लक्ष्य दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ को जोड़कर यात्रियों को सुविधा पहुंचाना है। दरअसल, वर्तमान में गाजियाबाद में आठ स्टेशनों के बीच 34 किमी का आरआरटीएस खंड चालू है। उनमें साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुरादनगर, मोदीनगर (दक्षिण) और मोदीनगर (उत्तर) शामिल हैं। दिल्ली से मेरठ तक संपूर्ण आरआरटीएस 2025 तक संचालित करने का लक्ष्य है।

एनसीआर का क्षेत्र (Delhi NCR Region City)

हरियाणा के 14 जिले NCR में

  • फरीदाबाद
  • गुरुग्राम
  • नूंह
  • रोहतक
  • सोनीपत
  • रेवाड़ी
  • झज्जर
  • पानीपत
  • पलवल
  • भिवानी
  • चरखी
  • दादरी
  • महेंद्रगढ़
  • जिंद
  • करनाल

यूपी के 8 जिले NCR में,

  • मेरठ
  • गाजियाबाद
  • गौतमबुद्ध नगर
  • बुलंदशहर
  • बागपत
  • हापुड़
  • शामली
  • मुजफ्फरनगर

राजस्थान जिले NCR में

  • अलवर
  • भरतपुर

पूरी दिल्ली NCR में

भूमिगत स्टेशनों पर लगा ईसीएस

इन सबके बीच आरआरटीएस कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेन के लिए बनाए जा रहे भूमिगत स्टेशनों में एनवायरमेंट कंट्रोल सिस्टम (ईसीएस) लगाया जा रहा है, जिसमें 8 से 23 मीटर की गहराइन में विकसित हो रहे इन स्टेशनों में यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। ईसीएस सिस्टम भूमिगत स्टेशनों में निरंतर ताजी हवा, कूलिंग और वेंटिलेशन कर तापमान सामान्य रखेगा। यह सिस्टम दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के सभी चार भूमिगत रेलवे स्टेशनों दिल्ली में आनंद विहार और मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल में स्थापित किया जा रहा है।

मेरठ जिले में 13 आरटीएसएस स्टेशन

मेरठ स्टेशन चालू होने वाला पहला आरआरटीएस स्टेशन होगा। एनसीआरटीसी के अधिकारियों के मुताबिक, मेरठ जिले में 13 स्टेशन हैं, जिनमें से चार समर्पित आरआरटीएस स्टेशन हैं और शेष नौ स्थानीय मेट्रो मॉड्यूल का हिस्सा होंगे जो आरआरटीएस बुनियादी ढांचे का उपयोग करके चलेंगे। सुरक्षा निरीक्षण चल रहा है और मेरठ (दक्षिण) स्टेशन पर काम पूरा हो चुका है। एक बार जब सीएमआरएस निरीक्षण पूरा हो जाएगा और हमें मंजूरी मिल जाएगी, तो स्टेशन परिचालन के लिए तैयार हो जाएगा। इसमें तीन ट्रैक और तीन प्लेटफार्म हैं, जिनमें से दो आरआरटीएस ट्रेनों के लिए और एक स्थानीय मेट्रो मॉड्यूल के लिए है। एक प्रमुख पार्किंग स्थल भी प्रदान किया गया है। इससे गाजियाबाद, मेरठ और आसपास के शहरों के यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।

मेरठ स्टेशन पर सबसे बड़ी पार्किंग

मेरठ (दक्षिण) स्टेशन पर ग्राउंड, मेजेनाइन, कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म लेवल होंगे। स्टेशन की लंबाई लगभग 215 मीटर और चौड़ाई लगभग 36 मीटर है। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए दो प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, आरआरटीएस कॉरिडोर पर मेरठ (दक्षिण) आरआरटीएस स्टेशन पर उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्किंग सुविधा होगी। यहां एक समय में लगभग 1,200 वाहनों को खड़ा किया जा सकता है। इतना ही नहीं इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधा उपलब्ध रहेगी।

30 मिनट में दिल्ली से पहुंचेंगे मेरठ

दिल्ली से मेरठ के बीच 82 किलोमीटर रूट खुलने और नमो भारत के संचालन से यात्री लगभग 30 से 35 मिनट में दिल्ली पहुंच सकेंगे। परियोजना निर्माण में लगी संस्था का दावा है कि साल 2025 के जून माह तक इसका कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। आपको बता दें कि 21 अक्टूबर 2023 को पहली नमो भारत (रैपिड ट्रेन) का उद्घाटन पीएम मोदी ने साहिबाबाद से दुहाई तक किया था। फिर 17 किलोमीटर के ट्रैक विस्तारित कर दुहाई से मोदीनगर नॉर्थ तक नमो भारत को चलाया गया। अब एक बार फिर इसे मोदीनगर नॉर्थ से आगे बढ़ाकर मेरठ साउथ तक चलाया जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट तक जाएगी रैपिड

इधर, नमों भारत को जेवर एयरपोर्ट (Jewar Airport) से कनेक्टिविटी मिलने वाली है। नमो भारत ट्रेन का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से टर्मिनल तक जाने के लिए गाजियाबाद आरआरटीएस से एयरपोर्ट तक 72.2 किलोमीटर तक लंबा ट्रैक बिछाए जाने की योजना बनाई गई है। फिलहाल, यमुना प्राधिकरण ने जमीन के नीचे से ट्रैक के जाने का प्रस्ताव बनाया है। इस प्रस्ताव को यमुना प्राधिकरण की ओर से शासन को भेज दिया गया है। इस प्रस्ताव को पूरा करने के लिए 600 करोड़ रुपए खर्च होने की योजना बनाई गई है।

रैपिड रेल का किराया ( Rapid Rail Ticket Price)

82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद कॉरिडोर पर अभी 17 किमी. के खंड दुहाई-साहिबाबाद तक स्टैंडर्ड क्लास का किराया 20 से 50 रुपये और प्रीमियम क्लास का किराया 40 से 100 रुपये तक होगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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