Ghaziabad Sun City Township: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सनसिटि टाउनशिप में जल्द ही लोगों को आवासीय और व्यावसायिक भूखंड खरीदने का मौका मिलने वाला है। जानकारी के लिए जीडीए ने सनसिटी टाउनशिप के संशोधित डीपीआर पर सुझाव और आपत्ति मांगी है। आपत्ति और सुझाव की अंतिम तिथि 7 जुलाई तय की गई है। प्राप्त आपत्ति और सुझाव का निपटान करने के बाद बोर्ड की तरफ से इसे मंजूरी मिलेगी।
कितनी एकड़ जमीन पर होगा सनसिटी टाउनशिप का विकास
जानकारी के लिए बता दें कि सनसिटी टाउनशिप का विकास संशोधित डीपीआर के अनुसार, 2,420.11 एकड़ की भूमि पर किया जाएगा। इसमें डासना, बयाना, नायफल, सादिकपुर, काजीपुरा, सादतनगर इकला और रघुनाथपुर के गांव की जमीन को शामिल किया गया है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, जीडीए के अधिकारियों ने संशोधित डीपीआर सुझाव और आपत्ति जताने के लिए 30 दिन का समय दिया था, जो 7 जुलाई को पूरा हो जाएगा। उसके बाद प्राप्त आपत्ति और सुझाव के निपटान का कार्य किया जाएगा।
जीडीए की बोर्ड बैठक में मिलेगी मंजूरी
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित डीपीआर पर प्राप्त आपत्ति के निपटान और सुझाव के आधार पर किए गए बदलावों के बाद इसे जीडीए की बोर्ड बैठक में पेश कर मंजूरी दिलाई जाएगी। अधिकारी ने बताया कि सनसिटी टाउनशिप को बोर्ड बैठक में मंजूरी मिलने के बाद इसे शासन के पास भेजा जाएगा, जहां से मंजूरी मिलने में दो से तीन महीने तक का समय लग जाएगा। इसके बाद शासन से मंजूरी मिलने के बाद टाउनशिप का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा।
टाउनशिप में भूखंड के अलावा फ्लैट भी मिलेंगे
शासन की मंजूरी मिलने के बाद सनसिटी टाउनशिप का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद लोग यहां आवासीय और व्यावसायिक भूखंड ले पाएंगे। इसके साथ ही यहां फ्लैट भी मिल सकेंगे। इस टाउनशिप से न केवल लोगों को अपन सपनों का घर मिलेगा, बल्कि लाखों लोगों को रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
बता दें कि इससे पहले टाउनशिप का विकास 4,312 एकड़ जमीन पर किया जाना था। लेकिन बिल्डर किसानों से जमीन खरीदने में असमर्थ रहे, जिस कारण डीपीआर को संशोधित करना पड़ा क्योंकि टाउनशिप के विकास के लिए जमीन अब कम हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, 2021 में 4,312 एकड़ जमीन की बजाए 828 एकड़ जमीन पर टाउनशिप का प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें 372 एकड़ जमीन जीडीए द्वारा बिल्डरों को दी गई थी। बताया जा रहा है कि पहले डीपीआर में 46 प्रतिशत जमीन, वह थी जो पुर्नग्रहण और अधिग्रहण के जरिए मिली थी। यही कारण था कि जीडीए ने संशोधित डीपीआर को कैंसिल कर दिया था। डीपीआर में क्षेत्रफल बढ़ाने की शर्त थी, जिसके बाद ये मामला उच्च स्तरीय समिति में चला गया।
