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Siwan: अररिया के बाद गंडक नहर में समाया पुल, बांध भी धराशायी; बस्ती हुई पानी-पानी

सीवान में बह रही गंडक नहर पर बना पुल और बांध अचानक टूट गए, जिससे कई गांवों में पानी भर गया है। फिलहाल बांध के पानी को रोकने का प्रयास जारी है।

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गंडक नहर का पुल टूटा

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

सीवान: गंडक नहर पर बना पुल पिलर धंसते ही धड़ाम से ध्वस्त हो गया। पुल गिरने से अचानक आई तेज आवाज से इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि, उस दौरान पुल से कोई वाहन इत्यादि नहीं गुजर रहा था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। बताया जा रहा है कि ये पुल महाराजगंज प्रखंड के पटेढी बाजार और दरौंदा प्रखंड के रामगढ़ पंचायत को जोड़ता था। फिलहाल, पुल टूटने से आवागमन बाधित हो गया है। इससे रोजाना गुजरने वाले हजारों राहगीरों को समस्या का सामना करना पड़ेगा। उधर, नहर का बांध टूटने से नहर एक जगह से फूट गई है, जिसकी वजह से कई गांवों में पानी भर गया है।

गांव में घुसा पानी

पुल टूटने के साथ गडंक नहर का बांध टूटने की भी खबर है। इससे कई गांवों में पानी घुस गया, जिससे इलाके में अफरा तफरी का माहौल है। किसानों के खेतों में डाले गए धान का बीज भी बर्बाद हो गया है। फिलहाल, मौके पर गंडक विभाग के अधिकारी और कर्मी पहुंचे हुए है और नहर के बांध को मरम्मत करने की कवायत की जा रही है।

बांध से रिसाव की थी जानकारी

घटना मैरवा प्रखंड के नवादा गांव की है। बताया जा रहा है कि गंडक नहर की ढलाई का कार्य किया गया था। इसके बावजूद भी बांध से रिसाव होने लगा और देर रात गंडक की बड़ी नहर अचानक फूट गई। उसके बाद नहर का बांध तोड़ते हुए पानी का धार गांव में घुस गया। कई लोगों के घरों में पानी प्रवेश करने लगा तो लोगों की नींद टूटी और अफरातफरी का माहौल हो गया। वहीं खेतों में डाले गए धान के बिछड़े भी बर्बाद हो गए।

हालांकि अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि नहर का बांध कैसे और क्यों टूट गया। गंडक विभाग के अभियंता मदन मोहन ने कहा की नहर की ढलाई में कोई कमी नहीं थी। आउटलेट के लिए थोड़ी सी जगह छोड़ी गई है, उसमें से पानी का रिसाव हुआ होगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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