आजकल कई लोग आयुर्वेदिक हेल्थ सप्लीमेंट्स के रूप में अश्वगंधा युक्त उत्पादों को शामिल करते हैं। अगर आप भी ऐसे किसी उत्पाद का सेवन करते हैं, तो अब थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है। दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने सप्लीमेंट के पैकेट पर दी गई सामग्री (Ingredients) की जानकारी जरूर जांच लें। यदि उसमें जड़ों की बजाय पत्तियों या उनके अर्क का जिक्र है, तो उसका इस्तेमाल तत्काल प्रभाव से बंद कर देना चाहिए।
जड़ों के इस्तेमाल को मान्यता
एफएसएसएआई के निर्देशों के मुताबिक, अश्वगंधा की जड़ों का उपयोग अब भी सुरक्षित और मान्य है, लेकिन पत्तियों और उनके एक्सट्रैक्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा लगाना अनिवार्य समझा गया है। यानी जो कंपनियां नियमों का पालन करते हुए केवल जड़ों से बने सप्लीमेंट तैयार करती हैं, उनके प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल को मंजूरी है, लेकिन यदि कोई कंपनी पत्तियों का उपयोग करती पाई गई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
कंपनियों को स्पष्ट लेबलिंग के निर्देश
एडवाइजरी करते हुए सरकार ने सभी हेल्थ सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने खाद्य उत्पादों पर साफ-साफ उल्लेख करें कि उनमें अश्वगंधा का कितने फीसदी इस्तेमाल किया गया है।
पत्तियों पर प्रतिबंध क्यों लगा?
कहा गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में 'रिएक्टिव विथानोलाइड्स' की मात्रा ज्यादा होती है। कंपनियां कम लागत में प्रोडक्ट बनाने के लिए पत्तियों का इस्तेमाल करती हैं, क्योंकि जड़ें अपेक्षाकृत महंगी होती हैं। हालांकि, इन तत्वों का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए इन्हें स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना गया है। यह प्रतिबंध सिर्फ पत्तियों और उनके अर्क से बने सप्लीमेंट्स पर लागू है। जड़ों से बने प्रोडक्ट अब भी सुरक्षित माने जा रहे हैं। लिहाजा, उत्पाद खरीदते समय इन बातों का खास ख्याल रखना होगा।
