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कागजों में गोवा-महाराष्ट्र, गुरुग्राम में हो रही थी शराब की बिक्री; ‘THE THEKA’ के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी

शराब सिंडिकेट ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों के नाम पर जरूरी कस्टम लाइसेंस और दस्तावेज हासिल किए गए। विदेशी शराब सप्लायर कंपनियों को बैंकिंग चैनल के जरिए भुगतान भी किया गया।

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फाइल फोटो

गुरुग्राम : ED के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने विदेशी शराब की अवैध खरीद-बिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब में 10 ठिकानों पर छापेमारी की है। ED ने यह सर्च ऑपरेशन 3 और 4 नवंबर 2026 को चलाया। जांच के दायरे में गुरुग्राम में ‘THE THEKA’ नाम से संचालित शराब का ठेका भी है, जिसका मालिकाना हक अंकुश गोयल और उनके अन्य पार्टनर्स के पास बताया गया है।

ED की यह कार्रवाई विदेशी शराब के बड़े सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। आरोप है कि सिंडिकेट बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप वाली विदेशी शराब खरीदकर उसका अवैध भंडारण करता था और फिर लाइसेंसी शराब के ठेके के जरिए ग्राहकों को बेचता था।

कैसे चल रहा था शराब की तस्करी और टैक्स चोरी का खेल?

ED की जांच हरियाणा पुलिस की FIR और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई थी। मामला विदेशी शराब की अवैध बिक्री और इंपोर्टेड फॉरेन लिकर (IFL) के बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर सिस्टम के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।

दरअसल, बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर व्यवस्था के तहत एक राज्य से दूसरे राज्य में विदेशी शराब को कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी दिए बिना ट्रांसफर किया जा सकता है। लेकिन इस शराब को तय प्रक्रिया के मुताबिक निर्धारित बॉन्डेड वेयरहाउस तक पहुंचाना जरूरी होता है।

आरोप है कि शराब सिंडिकेट ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों के नाम पर जरूरी कस्टम लाइसेंस और दस्तावेज हासिल किए गए। विदेशी शराब सप्लायर कंपनियों को बैंकिंग चैनल के जरिए भुगतान भी किया गया।

इसके बाद शराब को हरियाणा के बॉन्डेड वेयरहाउस में ट्रांसफर कराया गया, लेकिन उसे गोवा या महाराष्ट्र के निर्धारित वेयरहाउस में भेजने के बजाय ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से सीधे गुरुग्राम के शराब ठेकों तक पहुंचा दिया गया।

यानी कागजों में शराब एक राज्य से दूसरे राज्य के बॉन्डेड वेयरहाउस में जा रही थी, जबकि हकीकत में उसे गुरुग्राम में बेचा जा रहा था। इस तरह कथित तौर पर कस्टम ड्यूटी, सेस और अन्य टैक्स की चोरी की गई।

एक लाख से ज्यादा विदेशी शराब की बोतलें खरीदी गईं

ED की जांच में सामने आया है कि शराब सिंडिकेट ने जून 2025 से नवंबर 2025 के बीच एक लाख से ज्यादा बोतल इंपोर्टेड विदेशी शराब खरीदी थी।

जांच एजेंसी के मुताबिक, 2025-27 की अवधि के लिए शराब का लाइसेंस हासिल करने के बाद सिंडिकेट ने बिना होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप वाली विदेशी शराब खरीदने और बेचने की योजना बनाई थी।

इस शराब को ‘द ठेका’ के जरिए वैध स्टॉक बताकर बेचा गया। आरोप है कि इस अवैध कारोबार में सिंडिकेट ने 20 से 25 फीसदी तक मुनाफा कमाया और 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की अपराध से अर्जित कमाई (Proceeds of Crime) पैदा की।

आबकारी विभाग ने पकड़ा था 3921 पेटी विदेशी शराब का स्टॉक

इस मामले में हरियाणा के आबकारी अधिकारियों की शिकायत अहम कड़ी बनी। 9 दिसंबर 2025 को आबकारी विभाग ने ‘द ठेका’ पर छापेमारी कर 3921 पेटी और 176 खुली बोतल इंपोर्टेड विदेशी शराब बरामद की थी।

जांच में पाया गया कि इस शराब पर जरूरी होलोग्राम और ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप मौजूद नहीं थीं।

इसके अलावा हरियाणा पुलिस ने शराब सिंडिकेट के कुछ सदस्यों के खिलाफ नकली शराब बेचने के आरोप में एक अन्य FIR भी दर्ज की थी।

छापेमारी में 11 लाख रुपये कैश और अहम दस्तावेज बरामद

ED की ताजा छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम दस्तावेज, विदेशी शराब की खरीद-फरोख्त से जुड़ी जानकारियां और डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें कस्टम बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर के तहत खरीदी और सप्लाई की गई विदेशी शराब का रिकॉर्ड भी शामिल है।

इसके अलावा छापेमारी के दौरान 11 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं।

फिलहाल ED इस पूरे नेटवर्क, शराब की खरीद-बिक्री, ट्रांसपोर्टरों की भूमिका और कथित तौर पर कमाई गई अपराध की रकम के लेन-देन की जांच कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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