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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे आखिर क्यों 4 साल लेट हो गया, वजह जान चौंक जाएंगे आप

Delhi Mumbai Expressway का निर्माण कार्य पूरा होने और आम जनता के लिए खोले जाने का सभी को इंतजार है। एक्सप्रेसवे के कई हिस्से जनता के लिए खोल दिए गए हैं, लेकिन गुजरात में तीन सेक्शन ऐसे हैं, जिन्होंने एक्सप्रेसवे की रफ्तार को थामा हुआ है। यहां 20 फीसद काम ही पूरा हो पाया है। चलिए जानते हैं -

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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों पर दौड़ रही गाड़ियां

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश का सबसे लंबा ही नहीं सपनों का एक्सप्रेसवे भी है। 1386 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे से देश को बड़ी उम्मीदें हैं। देश लंबे समय से इसका काम पूरा होने और इसके आम जनता के लिए खोले जाने का इंतजार भी कर रहा है। हालांकि, एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों को आम ट्रैफिक के लिए खोला जा चुका है, लेकिन 87 किमी के हिस्से ने एक्सप्रेसवे की रफ्तार पर ब्रेक लगा रहा था। इस 87 किलोमीटर के हिस्से का कॉन्ट्रैक्ट जिस कंपनी को मिला है, उसकी निर्माण की सुस्त रफ्तार के चलते एक्सप्रेसवे पहले ही 4 साल लेट हो चुका है। चलिए जानते हैं क्या है पूरा माजरा -

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कहां हो रही देरी?

दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे के तीन पैकेज ऐसे हैं, जिनमें अभी काम बचा हुआ है। कुल 87 किमी लंबे यह तीनों पैकेज (पैकेज नंबर 8, 9 और 10) गुजरात में आते हैं और तीनों पैकेज का काम एक ही कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। यह तीनों पैकेज हैं, पैकेज 8 जुजुवा से गंडेवा, पैकेज 9 करवाड़ से जुजुवा और पैकेज 10 तलसारी से करवाड़।

इन पैकेज पर कितना काम हुआ?

प्रमुख अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेसवे के अनुसार 87 किमी के इन तीनों पैकेज पर अभी तक 20 फीसद काम ही पूरा हो पाया है। पुणे के कॉन्ट्रैक्टर, रोडवे सॉल्यूशन्स इंडिया इंफ्रा लिमिटेड (RSIIL) को कॉन्ट्रैक्ट मिले 4 साल हो गए और इन 48 महीनों में सिर्फ 20 फीसद काम ही पूरा हुआ।

बता दें कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 1386 किमी होने वाली है। इस एक्सप्रेसवे को 1.04 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। पुणे के रोडवे सॉल्यूशन्स इंडिया इंफ्रा लिमिटेड (RSIIL) कॉन्ट्रैक्टर को साल 2021 में इन तीनों पैकेज को बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। निर्माण कार्य में देरी के चलते साल 2023 में NHAI ने दो पैकेज के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया था। नवंबर 2023 में इन दोनों पैकेज के लिए फिर से बिड मंगवाई गई और सबसे कम बोली लगाने के चलते रोडवे सॉल्यूशन्स इंडिया इंफ्रा लिमिटेड को एक बार फिर इन दोनों पैकेज को बनाने की जिम्मेदारी दे दी गई।

delhi mumbai expressway underconstruction.

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर यहां सुस्त है रफ्तार

निर्माण की धीमी रफ्तार से NHAI भी परेशान

4 साल का समय बीत चुका है और इस 87 किमी के स्ट्रैच पर 20 फीसद से भी कम ही काम हुआ है। काम की इस धीमी रफ्तार के चलते सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में भी प्रश्न उठ रहे हैं। निर्माण की धीमी रफ्तार से परेशान होकर NHAI अब RSIIL को नोटिस देने पर विचार कर रही है, इससे RSIIL का कॉन्ट्रैक्ट भी रद्द हो सकता है और ऐसा होने पर निर्माण कार्य में और देरी होगी।

क्यों हुई देरी?

RSIIL के डायरेक्टर नवजीत गाढोके का कहना है कि NHAI की तरफ से जमीन उपलब्ध न कराने के कारण काम में देरी हुई है। उधर NHAI अधिकारियों ने काम की धीमी रफ्तार के लिए RSIIL के खराब परफॉर्मेंस और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े विवादों और मुकदमों को जिम्मेदार ठहराया है। बता दें कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को कुल 53 पैकेजों में बांटा गया है और सबसे खराब हालात इन्हीं तीन पैकेज (8, 9 और 10) पर हैं। गुजरात में वडोदरा-विरार खंड में एक्सप्रेसवे का काम इन तीन पैकेज पर अटका हुआ है। इसके अलावा गुजरात में एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो चुका है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के सभी सेक्शन का काम पूरा हो जाने पर दिल्ली से मुंबई स्थिति जवाहरलाल नेहरू पोर्ट की दूरी 180 किमी तक कम हो जाएगी। यही नहीं दोनों शहरों के बीच सड़क के रास्ते सफर में लगने वाला समय भी आधा रह जाएगा। दिल्ली-लालसोट के साथ ही गुजरात और राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से आम ट्रैफिक के लिए खोले जा चुके हैं।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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