राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल हर दिन औसतन 14 झपटमारी के मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून तक इस जुर्म के 2,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि पिछले दो सालों की तुलना में मामलों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन यह समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।
सांसद के साथ झपटमारी
हाल ही में, लोकसभा सदस्य और तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै से सांसद आर सुधा को चाणक्यपुरी के राजनयिक एन्क्लेव इलाके में उनकी सोने की चेन झपटने की कोशिश के दौरान मामूली चोटें आईं। सांसद सुबह की सैर पर निकली थीं जब यह घटना घटी। सुधा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस घटना की जानकारी दी और इसे लेकर गहरा सदमा जताया। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली के उच्च सुरक्षा वाले इलाके में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो वे कहां सुरक्षित महसूस करेंगी।
पिछले 2 साल के आंकड़ें
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 की पहली छमाही में झपटमारी के 2,503 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में इसी अवधि में ये मामले 3,865 थे। यह आंकड़ा मामलों में गिरावट का संकेत देता है, लेकिन झपटमारी की समस्या की निरंतरता को दर्शाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, झपटमार आमतौर पर चोरी किए गए या अपंजीकृत दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और अपराध को बहुत तेजी से अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। उनका निशाना अक्सर अकेली चलने वाली महिलाएं या बुजुर्ग होते हैं। अपराधी कम रोशनी वाले, कम भीड़-भाड़ वाले और सीसीटीवी कैमरों की पहुंच से बाहर इलाकों का सहारा लेते हैं ताकि पकड़े जाने से बच सकें।
पुलिस के लिए चुनौती
एक अधिकारी ने बताया कि कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे या नंबर प्लेट की स्पष्ट तस्वीर नहीं ले पाते। इसके अलावा, अपराधी जांचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए हेलमेट या जैकेट उतारकर गाड़ी छोड़कर भाग जाते हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि इतनी तेजी से वारदात होने के कारण पीड़ित अपराधियों या उनकी गाड़ियों की पहचान नहीं कर पाते, जिससे जांच में मुश्किलें आती हैं।
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