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दिल्ली में झपटमारों का बोलबाला! छह महीने में 2,500 से अधिक झपटमारी के मामले दर्ज, हर दिन 14 घटनाएं

दिल्ली में झपटमारी की इस बढ़ती घटनाओं ने राजधानी की सार्वजनिक सुरक्षा, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पुलिस की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि अपराधी नई-नई तकनीकों और चालाकी से वारदात को अंजाम देते हैं।

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दिल्ली में लगातार हो रही है चेन स्नेचिंग (फोटो- ANI)

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल हर दिन औसतन 14 झपटमारी के मामले सामने आ रहे हैं। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून तक इस जुर्म के 2,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि पिछले दो सालों की तुलना में मामलों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन यह समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

सांसद के साथ झपटमारी

हाल ही में, लोकसभा सदस्य और तमिलनाडु के मयिलाडुतुरै से सांसद आर सुधा को चाणक्यपुरी के राजनयिक एन्क्लेव इलाके में उनकी सोने की चेन झपटने की कोशिश के दौरान मामूली चोटें आईं। सांसद सुबह की सैर पर निकली थीं जब यह घटना घटी। सुधा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस घटना की जानकारी दी और इसे लेकर गहरा सदमा जताया। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली के उच्च सुरक्षा वाले इलाके में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो वे कहां सुरक्षित महसूस करेंगी।

पिछले 2 साल के आंकड़ें

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2024 की पहली छमाही में झपटमारी के 2,503 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में इसी अवधि में ये मामले 3,865 थे। यह आंकड़ा मामलों में गिरावट का संकेत देता है, लेकिन झपटमारी की समस्या की निरंतरता को दर्शाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, झपटमार आमतौर पर चोरी किए गए या अपंजीकृत दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और अपराध को बहुत तेजी से अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। उनका निशाना अक्सर अकेली चलने वाली महिलाएं या बुजुर्ग होते हैं। अपराधी कम रोशनी वाले, कम भीड़-भाड़ वाले और सीसीटीवी कैमरों की पहुंच से बाहर इलाकों का सहारा लेते हैं ताकि पकड़े जाने से बच सकें।

पुलिस के लिए चुनौती

एक अधिकारी ने बताया कि कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे या नंबर प्लेट की स्पष्ट तस्वीर नहीं ले पाते। इसके अलावा, अपराधी जांचकर्ताओं को गुमराह करने के लिए हेलमेट या जैकेट उतारकर गाड़ी छोड़कर भाग जाते हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि इतनी तेजी से वारदात होने के कारण पीड़ित अपराधियों या उनकी गाड़ियों की पहचान नहीं कर पाते, जिससे जांच में मुश्किलें आती हैं।

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Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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