दिल्ली

तहव्वुर राणा की NIA हिरासत के चलते दिल्ली में अलर्ट! लगातार दूसरे दिन बंद रहा जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2

तहव्वुर राणा के एनआईए की हिरासत में होने से जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 बंद रहा। एनआईए की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को राणा को 18 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटियाला हाउस अदालत परिसर से एनआईए मुख्यालय में शुक्रवार को लाया गया।

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जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 कब तक बंद रहेगा?

Tahawwur Rana in NIA Custody: मुंबई में साल 2008 में हुए भीषण आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा के राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की हिरासत में होने के कारण एजेंसी के मुख्यालय के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा।

कब तक बंद रहेगा दिल्ली का जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2

एनआईए ने शुक्रवार सुबह 64 वर्षीय राणा को 18 दिन की हिरासत में ले लिया और उससे 26/11 के हमलों की साजिश का पता लगाने के लिए पूछताछ शुरू कर दी। मुंबई में हुए आतंकी हमलो में 166 लोगों की मौत हो गई थी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रवक्ता ने कहा, 'दिल्ली पुलिस के अगले आदेश तक जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 बंद रहेगा।'

यात्रियों के लिए खुले हैं अन्य सभी प्रवेश और निकास गेट

जेएलएन मेट्रो स्टेशन का गेट नंबर 2 एनआईए मुख्यालय के सबसे नजदीक है और उसे (राणा) यहां लाए जाने से पहले बृहस्पतिवार को इसे बंद कर दिया गया था। डीएमआरसी के प्रवक्ता ने बताया कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं तथा स्टेशन के अन्य सभी प्रवेश और निकास द्वार यात्रियों के लिए खुले हैं।

18 दिन तक एनआईए की हिरासत में रहेगा तहव्वुर राणा

एनआईए की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को राणा को 18 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटियाला हाउस अदालत परिसर से एनआईए मुख्यालय में शुक्रवार को लाया गया। एनआईए ने एक बयान में कहा, 'राणा 18 दिन तक एनआईए की हिरासत में रहेगा। इस दौरान जांचकर्ता 2008 के मुंबई हमलों के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने के लिए उससे गहन पूछताछ करेंगे।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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