Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा में घुला जहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा। गुरुवार को हवा की गुणवत्ता में मामूली सुधार देखने को मिला था। जिसके बाद शुक्रवार शाम को फिर से एक्यूआई 400 पार पहुंच गया। आज भी दिल्ली की एयर क्वालिटी गंभीर स्तर पर बनी हुई है। राजधानी में आज धुंध की परत छाई रही। साथ ही यमुना नदी में भी पॉल्यूशन अधिक है। जिसकी वजह से नदी पर जहरीले झाग देखने को मिल रहे हैं।
इन इलाकों का एक्यूआई 450 पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार दिल्ली में शुक्रवार शाम 4 बजे औसत एक्यूआई 393 दर्ज किया गया। आज सुबह 9 बजे दिल्ली की एयर क्वालिटी गंभीर श्रेणी में रिकॉर्ड हुई। यहां का एक्यूआई 422 रहा। इस दौरान 9 इलाके ऐसे रहे, जहां का एक्यूआई 450 से ज्यादा दर्ज किया गया। जिसे बेहद गंभीर की श्रेणी में माना जाता है। इन इलाकों में अलीपुर, आनंद विहार, अशोक विहार, बवाना, जहांगीरपुरी, मुंडका, पंजाबी बाग, विवेक विहार और वजीरपुर शामिल हैं।
दिल्ली के इलाकों का AQI
| दिल्ली के इलाके | AQI |
| अलीपुर | 452 |
| आनंद विहार | 456 |
| अशोक विहार | 454 |
| आया नगर | 390 |
| बवाना | 456 |
| चांदनी चौक | 438 |
| द्वारका सेक्टर 8 | 437 |
| आईटीओ | 383 |
| जहांगीरपुरी | 457 |
| लोधी रोड | 360 |
| मुंडका | 450 |
| नजफगढ़ | 412 |
| नरेला | 438 |
| नेहरू नगर | 443 |
| आर के पुरम | 421 |
| रोहिणी | 447 |
| शादीपुर | 437 |
| सोनिया विहार | 444 |
| वजीरपुर | 465 |
25 नवंबर तक लागू रहेगा ग्रेप 4
इस बीच हाई कोर्ट ने ग्रेप के चौथे चरण के तहत प्रतिबंधों को सही तरह से अमल नहीं किये जाने पर नाराजगी जताई है। हाई कोर्ट ने कहा कि ‘ग्रेप-4’ के तहत कड़े प्रतिबंध कम से कम 25 नवंबर तक लागू रहेंगे, जिसके बाद समीक्षा कि जाएगी कि इन्हें हटाया जाए है या नहीं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्र की निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रदूषण के लिए वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी 15.16 प्रतिशत बताई। वहीं पराली जलाने से पीएम 2.5 (हवा में मौजूद कण) के स्तर में 17.9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई, जो एक अन्य प्रमुख कारण है।
क्या दिल्ली में हो पाएगी आर्टिफिशीयल रेन
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण संकट के बीच, सीपीसीबी ने उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान आपात उपाय के रूप में कृत्रिम बारिश कराने के लिए आवश्यक ‘क्लाउड सीडिंग’ की सीमित व्यवहार्यता को रेखांकित किया है। उसने इसके लिए अपर्याप्त नमी और पश्चिमी विक्षोभ से प्रभावित पहले से मौजूद बादलों पर निर्भरता का हवाला दिया है। सीपीसीबी ने एक आरटीआई जवाब में, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की पहल की सफलता के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नमी वाले बादलों का पहले से मौजूद होना आवश्यक है।
(इनपुट - भाषा)
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