दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम वर्षा के ट्रायल पर हाल फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई है। मौसम की स्थिति के कारण दिल्ली में कृत्रिम वर्षा का पहला परीक्षण स्थगित कर दिया गया। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि दिल्ली में कृत्रिम वर्षा का पहला परीक्षण स्थगित कर दिया गया है, जबकि प्रयोग के लिए क्लाउड-सीडिंग उपकरणों से सुसज्जित विमान मेरठ में तैयार खड़ा है।
दरअसल, मानसूनी सीजन खत्म होते ही दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। जैसे-जैसे सर्दी की आहट होगी वैसे-वैसे पॉल्यूशन का मीटर डेंजर जोन की तरफ बढ़ेगा। ये पिछले कई सालों के खराब रिकॉर्ड पर कहा जा सकता है। हालांकि, अभी दिल्लीवासी शुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं, लेकिन अगले महीने से एक्यूआई बढ़ने से तमाम तरह के प्रतिबंध लग सकते हैं। लिहाजा, इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कानपुर आईआईटी के सहयोग राजधानी में आर्टिफिशियल बारिश के लिए समझौता किया था।
कृत्रिम बारिश का पहला परीक्षण रुका
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पिछले दिनों बताया था कि राष्ट्रीय राजधानी में कृत्रिम बारिश का पहला परीक्षण सात से नौ अक्टूबर के बीच उत्तर-पश्चिम दिल्ली में किया जाएगा। लेकिन, पिछले 2 दिन से जारी मौसमी गतिविधियों के कारण ट्रायल की तारीख को बढ़ा दिया गया है।
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयासों के तहत उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) के परीक्षण से जुड़ी एक प्रायोगिक परियोजना शुरू करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए हरसंभव मोर्चे पर काम कर रही है, जिसमें इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देना भी शामिल है। आज का समझौता ज्ञापन दो महीने के कृत्रिम बारिश परीक्षण का मार्ग प्रशस्त करेगा, जो अक्टूबर और नवंबर के दौरान उपयुक्त दिनों में विमानों का उपयोग कर किया जाएगा। इसके निष्कर्ष हमें आगे का रास्ता तय करने में मदद करेंगे। यह पहल दिल्ली के लिए ऐतिहासिक और लाभकारी साबित होगी।
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