दिल्ली

'मंत्री या नेता ही नहीं'...झूठे केस में गिरफ्तार करने वालों को भी जेल भेजने का हो प्रावधान; नए बिल पर बोले मनीष सिसोदिया

आम आदमी पार्टी के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस कानून में सिर्फ मंत्री या नेता के लिए ही नहीं, बल्कि आम आदमी को झूठे केस में गिरफ्तार करने वालों को भी जेल भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए। अगर ताकत का दुरुपयोग करने वालों को सज़ा नहीं मिलेगी तो इस निरंकुश ताक़त का अहंकार उनको रावण बना देगा।

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आप नेता मनीस सिसोदिया (फोटो-@msisodia)

दिल्ली : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार द्वारा अपराधिक मामले में लगातार 30 दिन जेल में रहने वाले मुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने को लेकर लाए जा रहे कानून का स्वागत करते हुए कई अहम सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को झूठे केस में जेल भेजा जाता है तो उसे जेल भेजने वाले अधिकारी, एजेंसी और सरकार के मुखिया को भी जेल भेजने का कानून में प्रावधान होना चाहिए। अफसर-मुखिया को उतने ही साल तक जेल में रखा जाना चाहिए, जितने साल की सजा का प्रावधान उस आरोप में है। यह कानून आम आदमी को झूठे केस में जेल भेजने पर भी लागू होना चाहिए, तभी निरंकुश सत्ता के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लगेगी। यह कानून अभी अधूरा है, जिसका ईडी-सीबीआई की तरह दुरुपयोग होने की पूरी संभावनाएं हैं।

गुरुवार को मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान में एक नया संशोधन ला रही है, जिसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी राज्य या केंद्र सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी होती है, तो उन्हें एक महीने के भीतर अपना पद छोड़ना होगा या उन्हें हटा दिया जाएगा। यह प्रस्ताव स्वागत योग्य है। लेकिन बहुत संभावनाएं हैं कि जिस तरह ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग हुआ है, उसी तरह इस कानून का भी दुरुपयोग होगा। यह कानून अच्छा है। भ्रष्ट नेताओं में हमेशा यह डर बना रहना चाहिए कि भ्रष्टाचार करने पर उनकी कुर्सी जा सकती है। आम आदमी पार्टी तो कट्टर ईमानदार लोगों की पार्टी है। इसलिए वह इस तरह के किसी भी कदम का अच्छा ही मानेगी। लेकिन यह कानून अभी अधूरा है।

सत्तारूढ़ पार्टी को अत्यधिक शक्ति

मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह कानून केंद्र या राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी को अत्यधिक शक्ति देता है। इसलिए, मेरा सुझाव है कि इस कानून में यह अतिरिक्त प्रावधान जोड़ा जाए कि यदि किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तारी होती है और उन्हें जेल में रहना पड़ता है, तो एक महीने के भीतर उन्हें पद से हटा दिया जाए, यह अच्छी बात है। लेकिन, यदि बाद में वह नेता (चाहे वह मंत्री हो या मुख्यमंत्री) अगर निर्दोष साबित होता है और उसके उपर लगे आरोप सही नहीं होते हैं और उसको बरी कर दिया जाता है, तो इसका मतलब है कि उन पर लगे आरोप झूठे थे और राजनीतिक साजिश के तहत झूठे आरोप लगाए गए थे।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि ऐसे में, जिन लोगों ने ये झूठे आरोप लगाए, उनको जेल जाना चाहिए। जिस अधिकारी ने किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को गिरफ्तार करने का निर्णय लिया, उसको उतने साल के लिए जेल में डाला जाना चाहिए, जितने साल के झूठे आरोप उसने लगाए। साथ ही, जिस एजेंसी ने ये आरोप लगाए, उसके प्रमुख को भी उतने ही साल के लिए जेल की सजा मिलनी चाहिए, जितने साल के लिए झूठे आरोप उसने किसी मंत्री या मुख्यमंत्री पर लगाए।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह विशेषाधिकार केवल मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों तक सीमित क्यों रहे? यह आम नागरिक के लिए भी लागू होना चाहिए। देश की जेलों में लाखों लोग झूठे आरोपों के कारण सड़ रहे हैं। उन्हें झूठे आरोपों में जेल में डाल दिया जाता है और बाद में एक, दो या तीन साल बाद वे बरी होते हैं। कोर्ट एजेंसियों को फटकार लगाता है, लेकिन जिन अधिकारियों और नेताओं ने झूठे आरोप लगाए, वे मजे में रहते हैं। जिस व्यक्ति का जीवन झूठे आरोपों में एक, दो या तीन साल जेल में बीत जाता है, उसकी कोई क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती। इसलिए झूठे आरोप लगाने वालों को भी सजा मिलनी चाहिए।

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Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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