दिल्ली : दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में दवाओं, मेडिकल उपकरणों, मरीजों की चादरों, एक्स-रे मशीनों और एनेस्थीसिया से जुड़े सामान की खरीद में 650 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कई वस्तुओं को बाजार भाव से कहीं अधिक कीमत पर खरीदा गया और केंद्रीकृत खरीद प्रणाली का दुरुपयोग कर संदिग्ध टेंडर जारी किए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली DGHS पद से हटाई गईं डॉ. वत्सला अग्रवाल अब निलंबित कर दी गई हैं।
तत्कालीन डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और बीजेआरएम अस्पताल के पूर्व एचओओ डॉ. विनोद कुमार रंगा को निलंबित कर दिया है। वहीं भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदी गई दवाओं और उपकरणों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा है।
40 डॉक्टरों और कर्मचारियों का तबादला
विजिलेंस विभाग की छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण टेंडर फाइलें गायब मिलीं, जबकि कुछ अधिकारियों के लॉकरों से भी अहम दस्तावेज नहीं मिले। जांच में यह भी सामने आया है कि खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पसंदीदा लोगों की नियुक्तियां की गईं और पहले रोके गए टेंडरों को बाद में जल्दबाजी में मंजूरी दी गई। जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों समेत करीब 40 डॉक्टरों और कर्मचारियों का तबादला किया गया है। एसीबी ने लगभग 10 डॉक्टरों, 35 कर्मचारियों और आउटसोर्स स्टाफ को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैं तथा अब टेंडर प्रक्रिया, भुगतान रिकॉर्ड और गायब दस्तावेजों की कड़ियों को जोड़कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसियों को यह भी आशंका है कि खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पदों पर मनपसंद नियुक्तियां की गईं। ऐसे टेंडरों को भी मंजूरी मिलने के आरोप हैं जिन्हें पहले आपत्तियों के कारण रोका गया था। बाद में इन्हें असामान्य तेजी से स्वीकृति दिए जाने की बात सामने आई है।
जांच को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों का तबादला किया जा चुका है। एसीबी ने कई डॉक्टरों, कर्मचारियों और आउटसोर्स स्टाफ को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। साथ ही भुगतान रिकॉर्ड, टेंडर दस्तावेज और गायब फाइलों के बीच संबंध तलाशे जा रहे हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा दस्तावेज छिपाने, रिकॉर्ड नष्ट करने या जांच में बाधा डालने की कोशिश की गई तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
