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दिल्ली की हवा में मामूली सुधार: AQI सुधरकर 223 पर आया, 'ग्रेप-1' के बीच 'सीवियर' श्रेणी वाले इलाके हुए शून्य

GRAP 1 Delhi Pollution Update October: दिल्ली में 'ग्रेप-1' लागू होने के बाद हवा की गुणवत्ता में आंशिक सुधार देखा गया है। आज AQI 223 दर्ज किया गया और गंभीर श्रेणी में एक भी इलाका नहीं है।

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दिल्ली की हवा में मामूली सुधार: AQI सुधरकर 223 पर आया, 'ग्रेप-1' के बीच 'सीवियर' श्रेणी वाले इलाके हुए शून्य

Delhi Air Quality Improvement AQI 223: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से थोड़ी राहत मिलती दिख रही है। शहर में एंटी-पोल्यूशन एक्शन प्लान 'ग्रेप-1' (GRAP-1) लागू होने के बीच राजधानी की हवा की गुणवत्ता में आंशिक सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि, इसके बावजूद दिल्ली की हवा अभी भी 'खराब' श्रेणी में ही बनी हुई है।

वायु गुणवत्ता के प्रमुख आंकड़े

AQI में गिरावट: दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) आज 223 दर्ज किया गया, जबकि बीते दिन यह 245 के स्तर पर था।

'सीवियर' इलाकों में कमी: राहत की बात यह है कि जहां कल दिल्ली के 3 इलाके 'सीवियर' (गंभीर) कैटेगरी में थे, वहीं आज एक भी इलाका इस अति-गंभीर श्रेणी में नहीं है।

बनी हुई है चिंता: भले ही स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन हवा की यह स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है और लोगों को प्रदूषण से पूरी तरह राहत मिलने का इंतजार है।

'खराब' श्रेणी में पहुंचने पर ‘ग्रेप-1' की पाबंदियां लागू

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु गुणवत्ता ’खराब’ श्रेणी में पहुंचने पर बुधवार को चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (ग्रेप) के तहत पहले चरण के प्रतिबंध लागू कर दिये हैं।

बयान में कहा गया है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में एक्यूआई के ’खराब’ श्रेणी में ही बने रहने के आसार हैं।

ग्रेप के पहले चरण के तहत कई तरह के प्रतिबंध लागू हो जाते हैं। इसके तहत होटल, रेस्तरां और खुले ढाबों के तंदूर में ईंधन के तौर पर कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाती है। इसके अलावा डीजल जनरेटर के इस्तेमाल की अनुमति केवल आपातकालीन या आवश्यक परिस्थितियों में ही दी जाती है।

ग्रेप आपातकालीन उपायों की एक ऐसी व्यवस्था है, जो वायु गुणवत्ता के एक निश्चित स्तर से नीचे गिरने पर उसे और खराब होने से रोकने के लिए लागू की जाती है।

पहला चरण (ग्रेप-1) तब लागू होता है जब एक्यूआई 201 से 300 के बीच होता है। दूसरा चरण (ग्रेप-2) एक्यूआई 301 से 400 के बीच होने पर लागू किया जाता है। तीसरा चरण (ग्रेप-3) 401 से 450 के बीच और चौथा चरण (ग्रेप-4) एक्यूआई 450 से अधिक होने पर लागू होता है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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