मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ में महिला आरक्षण बिल को लेकर जबरदस्त विरोध और आक्रोश देखने को मिला। हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग उठाई। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष,खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के भीतर जो आक्रोश है,वह उनके हक की लड़ाई का प्रतीक है और इसे देशभर में पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी की इच्छा का गला घोंटने वालों को माफ नहीं किया जाएगा। सीएम ने यह भी कहा कि सरकार महिलाओं के हर फैसले के साथ खड़ी है और इस मुद्दे पर विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाने पर भी विचार किया जाएगा।
'नारी अपना अपना अपमान नहीं भूलती, ये याद रखना है'
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ये जो आपके अंदर की आग है, अपने हक की आग है, इसे बुझने नहीं देना है। कांग्रेस और उसके साथी विपक्षी दलों ने बहनों के हक पर डाका डाला है। वे अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं हो सकते। भारत में बहनों के हक के लिए भाइयों ने सदैव लड़ाइयां लड़ीं। राजा राम मोहन राय ने सती प्रथा के खिलाफ लड़ाई शुरू की। ज्योतिबा फुले ने नारी समानता के लिए लड़ाई लड़ी। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बहनों को अधिकार दिलाने के लिए लड़ाई शुरू की। महात्मा गांधी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के हक में आवाज उठाई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, नारी सब भूल जाती है, कभी अपना अपमान नहीं भूलती। यह हमको याद रखना है।
विपक्ष की जितनी आलोचना करें, उतनी कम
कार्यक्रम में वरिष्ठ विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि महिला आरक्षण बिल राजनीतिक मुद्दा नहीं था, यह बहनों का अधिकार था। विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार चाहते थे कि बहनों को उनका हक मिले। आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने इस पर बात भी की। लेकिन, जब फैसला लागू करने का समय आया, तो विपक्ष ने रोड़ा अटका दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने कुठाराघात किया।
