उत्तराखंड के कई जिलों में शुक्रवार तड़के मूसलाधार बारिश के चलते बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने भारी तबाही मचाई। इस भीषण आपदा में एक दंपति समेत छह लोगों की जान चली गई, जबकि 11 लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई अन्य लोगों के भी लापता होने की आशंका है। प्रभावित जिलों में चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और बागेश्वर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां कई घर और मवेशी मलबे में दब गए, कृषि भूमि तबाह हो गई, वाहन बह गए और संपर्क मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के अनुसार, बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र स्थित पौसारी गांव में शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे भारी बारिश से पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण पांच से छह मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना में दो महिलाओं – बसंती देवी जोशी और बचुली देवी – की मौत हो गई, जबकि बसंती देवी के पति रमेश चंद्र जोशी, गिरीश और पूरण जोशी लापता हैं। हादसे में बसंती देवी का बेटा पवन घायल हो गया है। एक अन्य घटना चमोली जिले के थराली तहसील के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में हुई, जहां भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन में एक दंपति की मौत हो गई और एक अन्य दंपति गंभीर रूप से घायल हो गया।
6 गांवों में भीषण तबाही
चमोली जिले के जिलाधिकारी डॉ. संदीप तिवारी ने जानकारी दी कि मोपाटा गांव में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक मकान और गोशाला इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में मकान में रह रहे तारा सिंह और उनकी पत्नी कमला देवी की मलबे में दबने से मौत हो गई। डॉ. तिवारी ने बताया कि इसी मलबे में फंसे विक्रम सिंह और उनकी पत्नी को रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला गया, हालांकि दोनों को चोटें आई हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जानकारी दी कि भूस्खलन की चपेट में आई गोशाला में बंधे लगभग 25 मवेशी भी मलबे में दबकर लापता हो गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार और जखोली क्षेत्रों के छह गांवों में लगातार बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और भारी नुकसान हुआ है।
तीन अलग-अलग जगहों पर फटा बादल
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले के जखोली क्षेत्र में एक मकान ढहने से एक महिला की मौत हो गई। उन्होंने यह भी बताया कि जिले के तीन अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं हुई हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, रुद्रप्रयाग जिले के लगभग आधा दर्जन गांवों, तालजामण, छेनागाड़, बड़ेथ, स्यूरं, किमाणा और अरखुंड में तड़के करीब पौने चार बजे भारी वर्षा के कारण बरसाती नालों में अचानक पानी और मलबे का भारी प्रवाह आया, जिससे कई मकान और गोशालाएं क्षतिग्रस्त हो गईं। जखोली में जान गंवाने वाली महिला की पहचान सरिता देवी के रूप में हुई है। वहीं, छेनागाड़ गांव में चार मजदूरों समेत कुल आठ लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, डुंगर गांव (छेनागाड़) और जौला बड़ेथ गांव में भी कुछ लोगों के लापता होने की सूचना मिली है।
बरसाती नालों में आई बाढ़
स्यूंर गांव से मिली जानकारी के अनुसार, वहां कुछ मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और एक वाहन भी पानी में बह गया। तालजामण गांव में कई इमारतों में दरारें आ गई हैं या वे धंस गई हैं। किमाणा गांव में भारी बारिश के चलते खेतों और सड़कों पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा जमा हो गया है। वहीं, अरखुंड गांव में एक तालाब और मुर्गी पालन केंद्र तेज बहाव में बह गए। बरसाती नालों में आई बाढ़ के कारण 30 से 40 परिवार फंस गए थे, लेकिन राहत और बचाव कार्य के तहत अब तक लगभग 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा, टिहरी जिले के बालगंगा क्षेत्र के गेंवाली गांव में भी अतिवृष्टि से व्यापक नुकसान हुआ है, हालांकि राहत की बात यह है कि वहां से किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।
लापता लोगों की तलाश जारी
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे गेंवाली गांव में भारी वर्षा के दौरान बरसाती नाले में आई बाढ़ से बड़ा नुकसान हुआ। बाढ़ के साथ आए मलबे से कई निजी संपत्तियां क्षतिग्रस्त हो गईं। गांव में दो मंदिर, दो छानियां, एक गोशाला, कृषि भूमि और संपर्क मार्ग इस आपदा की चपेट में आकर बर्बाद हो गए। इसके अलावा, मलबे में दो मवेशी दब गए और एक पैदल पुलिया भी टूट गई। प्राधिकरण ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें लापता लोगों की तलाश, बचाव और राहत कार्यों में जुटी हैं और यह अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
प्रशासन को अलर्ट रहने के आदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा से प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों से फोन पर बातचीत कर राहत और बचाव कार्यों को तेजी से अंजाम देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रभावित लोगों को बिना किसी देरी के सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने निर्देश दिया कि पूरे मानसून सीजन के दौरान शासन और प्रशासन को अलर्ट मोड में रहना होगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि जिलाधिकारी आपदा राहत कार्यों के लिए जिन संसाधनों और सुविधाओं की आवश्यकता बताएं, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए। सीएम ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार शीघ्र मुआवजा प्रदान किया जाए। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते अलकनंदा नदी, उसकी सहायक नदियां और मंदाकिनी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारीदेवी और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी का पानी सड़क पर आ गया है, जिससे उस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात ठप
पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने जानकारी दी कि मिनी गोवा बीच के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी भर जाने के कारण वाहनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई थी और यात्रियों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर रोका गया। हालांकि, करीब दो घंटे बाद जब नदी का जलस्तर सामान्य हुआ, तो मार्ग को पुनः खोल दिया गया। उन्होंने बताया कि नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के चलते धारी देवी क्षेत्र की दुकानों और नदी किनारे स्थित छह स्कूलों को एहतियात के तौर पर तत्काल बंद करवा दिया गया। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुलिस द्वारा तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया जा रहा है। भूस्खलन के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर बाधित हो गया है, जिसे बहाल करने का कार्य लगातार जारी है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य लें और पुलिस व प्रशासन द्वारा जारी किए जा रहे ताज़ा अपडेट पर विशेष ध्यान दें।
मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई जिलों के लिए भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। अगले 24 घंटों के लिए बागेश्वर, चमोली, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। वहीं, चंपावत, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर और उत्तरकाशी जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ घोषित किया गया है। इस वर्ष के मानसून सीजन में उत्तराखंड को प्राकृतिक आपदाओं का भारी सामना करना पड़ा है। 23 अगस्त को चमोली जिले के थराली क्षेत्र में टूनरीगाड़ बरसाती नाले में अतिवृष्टि से आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। इस घटना में एक युवती की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति लापता हो गया था। बाढ़ के मलबे से कई घर, दुकानें और तहसील कार्यालय बुरी तरह प्रभावित हुए थे। यहां तक कि उपजिलाधिकारी का सरकारी आवास भी क्षतिग्रस्त हो गया था।
(इनपुट - भाषा)
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