LPG Crisis : बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में एलपीजी कमी को लेकर चल रही सुनवाई में केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्थिति साफ की। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि वह इस मामले पर नजर बनाए रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद देश में गैस की उपलब्धता और वितरण को सुचारु बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। केंद्र सरकार कि तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए।
केंद्र भरोसा, हालात पर पूरी नजर
केंद्र की ओर से अंडर सेक्रेटरी रमेश कृष्णा ने हलफनामा दाखिल किया, जिसे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने रखा। हलफनामे में कहा गया है कि सरकार घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी जरूरी प्रयास कर रही है ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। हलफनामे में स्पष्ट किया गया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार बदल रही है। केंद्र सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि इसका असर भारत की एलपीजी आपूर्ति पर न पड़े। सरकार ने कहा कि ऐसे वैश्विक संकटों के दौरान स्थिति तेजी से बदलती रहती है और इस तरह के मामलों में नीतिगत निर्णय लेना सरकार का अधिकार और जिम्मेदारी है।
अदालत में चर्चा उचित नहीं, केंद्र की दलील
केंद्र ने अपने जवाब में यह भी कहा कि इस तरह के संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय संबंधों वाले मामलों पर अदालत में विस्तृत बहस करना उचित नहीं है। सरकार के मुताबिक, इन मुद्दों को प्रशासनिक स्तर पर ही बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर गड़बड़ी पर हो रही सख्त कार्रवाई
हलफनामे में कहा गया कि अगर कहीं स्थानीय स्तर पर एलपीजी की कमी या वितरण में गड़बड़ी होती है और वह किसी वितरक की लापरवाही या कानून के उल्लंघन के कारण है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी।
केंद्र और राज्यों को स्थिति संभालने दें: सरकार
सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले का दायरा कुछ जिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर व्यापक है। इसलिए बेहतर होगा कि भारत सरकार और राज्य सरकारों को मिलकर इस स्थिति से निपटने दिया जाए, ताकि बड़े सार्वजनिक हित में उचित फैसले लिए जा सकें।
कोर्ट ने पहले जताई थी हालात पर चिंता
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले हाईकोर्ट ने एलपीजी की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। अदालत ने Confidence Petroleum India Ltd समेत अन्य निजी कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे निर्यात के बजाय घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें।
एलपीजी वितरकों ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि देश में गैस की कमी के बावजूद कुछ निजी कंपनियां निर्यात को प्राथमिकता दे रही हैं। इससे खासतौर पर महाराष्ट्र और विदर्भ क्षेत्र में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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